Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षकों को एक बार फिर समय पर वेतन नहीं मिला है। अक्तूबर माह का वेतन अब तक जारी न होने से कर्मचारियों में गहरा रोष है। इस मुद्दे पर कर्मचारियों के चारों संगठन एकजुट हो गए हैं। उन्होंने वेतन संघर्ष समिति का गठन किया है।
मंगलवार को कर्मचारियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति के नेताओं ने वेतन में देरी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि यह समस्या बार-बार हो रही है। कर्मचारियों को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वेतन संघर्ष समिति का गठन
कर्मचारियों के चारों संगठनों ने मिलकर वेतन संघर्ष समिति बनाई है। समिति के अध्यक्ष सुरेश वर्मा और महासचिव नरेश कुमार शर्मा ने प्रदर्शन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों को पहली तारीख को वेतन मिल जाता है।
विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के साथ यह भेदभाव अनुचित है। वेतन में लगातार देरी से कर्मचारियों की वित्तीय योजनाएं चौपट हो रही हैं। उन्हें बैंक की किस्तें और अन्य भुगतान करने में दिक्कत हो रही है। इससे उन्हें आर्थिक दंड भी भरना पड़ सकता है।
राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल
वेतन में देरी का मुख्य कारण राज्य सरकार से ग्रांट का समय पर न मिलना है। विश्वविद्यालय को सरकारी अनुदान देर से मिलता है। इससे वेतन भुगतान में बाधा आती है। यह समस्या पहले भी कई बार सामने आ चुकी है।
कुछ महीने पहले भी वेतन न मिलने पर कर्मचारियों को आंदोलन करना पड़ा था। अब फिर वही स्थिति बन गई है। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से मांग की कि ग्रांट पूर्व की तरह एक साथ जारी की जाए। इससे भविष्य में ऐसी समस्या नहीं आएगी।
आंदोलन को मिल रहा है विस्तार
वेतन संघर्ष समिति ने गुरुवार सुबह 10 बजे से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया। यह धरना विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। कर्मचारी तब तक धरना देंगे जब तक उनका वेतन जारी नहीं हो जाता।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने भी बैठक की। संघ ने राजभवन की ओर मार्च करने का निर्णय लिया। वे राज्यपाल के समक्ष यह मामला उठाएंगे। शिक्षकों ने भी वेतन में देरी पर गंभीर चिंता जताई है।
कर्मचारियों की वित्तीय समस्याएं
सुरेश वर्मा और नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि वेतन न मिलने से कर्मचारियों को गंभीर परेशानी हो रही है। उन्हें बैंक ऋण की किस्तें चुकाने में दिक्कत आ रही है। कई कर्मचारियों को आर्थिक जुर्माना भरना पड़ सकता है। उनकी घरेलू जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि जल्द ही वेतन नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा। वे अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं।

