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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट: चामियाना सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के काम में देरी पर सख्त, अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने चामियाना स्थित एडवांस्ड इंटेंसिव मैटरनल एंड सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के विकास कार्यों में लगातार देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी आवश्यक काम तय समयसीमा में पूरे कराए। एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जरूरी बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं हुए हैं।

सड़क और साइनबोर्ड व्यवस्था पर सवाल

कोर्ट ने शिमला से अस्पताल तक पहुंच को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि तारा देवी, घनाहट्टी और कुफरी जैसे मुख्य मार्गों पर अस्पताल का पता बताने वाले पर्याप्त साइनबोर्ड नहीं लगे हैं। इससे मरीजों और उनके साथियों को अस्पताल ढूंढने में कठिनाई होती है। भटाकुफर से अस्पताल तक की सड़क का चौड़ीकरण भी अधूरा पड़ा है।

लगभग 2.4 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 900 मीटर का हिस्सा अभी भी सिंगल लेन है। जमीन अधिग्रहण और निधि जारी करने के पिछले आदेशों के बावजूद यह काम पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय में उम्मीद के अनुरूप प्रगति नहीं दिखी।

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पार्किंग और परिवहन की कमी

न्यायालय ने अस्पताल में पार्किंग सुविधा की कमी को गंभीर माना। एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए मात्र 60 गाड़ियों की पार्किंग बहुत कम है। ऐसे संस्थान को लगभग एक हजार वाहनों के रुकने की जगह चाहिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव को इस समस्या के समाधान का ब्योरा दाखिल करने के लिए कहा गया है।

हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट निगम के प्रबंध निदेशक से भी हलफनामा मांगा गया है। इंटर स्टेट बस टर्मिनल और आईजीएमसी से चामियाना अस्पताल तक सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी। बेहतर परिवहन सेवा के अभाव में मरीजों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अस्पताल की अन्य सुविधाओं का जायजा

रक्त संग्रहण की सुविधा पर कोर्ट ने रिपोर्ट दर्ज की। वर्तमान में एक ब्लड स्टोरेज यूनिट काम कर रही है। नए ब्लॉक में पूर्ण रक्त बैंक बनाने का प्रस्ताव है। इस कार्य के जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। इससे अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा।

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न्यायालय ने एक गैर सरकारी संगठन को अस्थायी जगह देने का भी निर्देश दिया। यह एनजीओ मरीजों और उनके साथ आए लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराता है। इस तरह की सेवाएं गरीब और दूर से आए लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होती हैं। स्वास्थ्य सेवा में सहयोगी सुविधाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

अधिकारियों के लिए चेतावनी

हाई कोर्ट ने राज्य प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है। अगली सुनवाई तक कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा। उन्हें काम में हुई देरी का कारण भी बताना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी।

न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 तक कई काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं। इनमें जमीन अधिग्रहण, सड़क किनारे सौर ऊर्जा स्ट्रीट लाइट लगाना और बिजली के खंभे हटाना शामिल है। फंड जारी करने में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया है। पहले के आदेशों की अनदेखी को स्वीकार्य नहीं माना गया।

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