Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की एक बड़ी याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव छह महीने टालने की सरकारी मांग को ठुकरा दिया। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव 30 अप्रैल 2026 से पहले कराए जाने चाहिए।
न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर और न्यायमूर्ति रमेश वर्मा की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के भी निर्देश दिए। यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।
सरकार ने दी थी क्या दलील?
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि हाल की प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापक नुकसान हुआ है। सार्वजनिक और निजी संपत्ति तथा सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। राज्य में आपदा प्रबंधन अधिनियम भी लागू है। इस आधार पर सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की थी।
सरकार का तर्क था कि जमीनी हालात सुधरने तक चुनाव टाल दिए जाएं। उन्होंने चुनाव कराने के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा था। लेकिन उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने लगातार तीन दिन सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
निर्वाचन आयोग ने क्या रखा था पक्ष?
राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि चुनाव को और टालना व्यावहारिक नहीं है। मई महीने में जनगणना कार्य शुरू हो जाएगा। जुलाई और अगस्त के मानसून महीनों में चुनाव कराना लगभग असंभव होगा। इसलिए समय रहते चुनाव प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
याचिकाकर्ता के वकील नंद लाल ने बताया कि अदालत ने मार्च में होने वाली स्कूल बोर्ड परीक्षाओं को भी ध्यान में रखा। उस दौरान मतदान केंद्र बनाना व्यावहारिक नहीं होगा। इसीलिए अप्रैल के अंत से पहले चुनाव पूरे करने के निर्देश दिए गए।
चुनाव क्यों हैं जरूरी?
पंचायती राज संस्थाओं का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। वहीं, 50 नगर निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी 2026 को खत्म होगा। राज्य में कुल 3,577 ग्राम पंचायतें हैं। 90 पंचायत समितियां और 11 जिला परिषद भी हैं। 71 नगर निकाय भी चुनाव का इंतजार कर रहे हैं।
विपक्ष ने भी चुनाव स्थगित किए जाने की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार चुनाव से बच रही है। समय पर चुनाव न होना स्थानीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। निर्वाचित निकायों के बिना विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।
अदालत ने क्या कहा?
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव अप्रैल के अंत से पहले पूरे होने चाहिए। अदालत ने सरकार और निर्वाचन आयोग को समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को निलंबित नहीं रखा जा सकता। संवैधानिक दायित्वों का पालन करना आवश्यक है।
इस फैसले के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग को जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करना होगा। मतदाता सूची अद्यतन करने से लेकर नामांकन प्रक्रिया तक सभी कदम शीघ्रता से उठाने होंगे। राज्य प्रशासन को भी चुनावी ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की तैनाती करनी होगी।

