Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई हैं। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने विश्वविद्यालय को प्रतीक्षा सूची में दूसरे नंबर पर रहे याचिकाकर्ता पंकज कुमार को नियुक्त करने का आदेश दिया है।
चयन प्रक्रिया में पाई गईं गड़बड़ियां
यह मामला मार्च 2019 में जारी एक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। विज्ञापन में सहायक प्रोफेसर (कृषि जैव प्रौद्योगिकी) के पद के लिए आवेदन मांगे गए थे। अदालत ने पाया कि चयन समिति ने मनमाने ढंग से योग्यता के मानदंड बदल दिए।
विज्ञापन में नहीं था समकक्षता का प्रावधान
अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन में ‘समकक्ष योग्यता’ का कोई प्रावधान नहीं था। फिर भी समिति ने 32 ऐसे उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार कर लिए, जिनके पास आवश्यक एमएससी (कृषि जैव प्रौद्योगिकी) की डिग्री नहीं थी। उनसे एमएससी (बायोटेक्नोलॉजी) की डिग्री को समकक्ष साबित करने वाले प्रमाणपत्र मांगे गए।
योग्य उम्मीदवारों को हुआ नुकसान
इस कार्रवाई ने उन योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया, जिनके पास सही डिग्री थी। चयन समिति ने एक कम योग्य उम्मीदवार की नियुक्ति की सिफारिश की। याचिकाकर्ता पंकज कुमार और डॉ. सन्नी चौधरी को प्रतीक्षा सूची में रखा गया।
अदालत का महत्वपूर्ण फैसला
अदालत ने फैसला सुनाया कि चयन समिति के पास विज्ञापन में दिए गए मानदंडों से हटने का कोई अधिकार नहीं था। उम्मीदवार भर्ती विज्ञापन की शर्तों को स्वीकार करते हैं। बाद में समकक्ष योग्यता का दावा नहीं किया जा सकता है। यह फैसला विश्वविद्यालय के अपने नियमों का भी उल्लंघन था।
नियुक्ति रद्द और नए आदेश
इन अनियमितताओं के आधार पर, हाईकोर्ट ने वर्ष 2021 में हुए चयन और नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। अदालत ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता पंकज कुमार को संबंधित पद पर नियुक्त करे। इसके अलावा, जाली दस्तावेजों की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया है।
दवा मामले में सजा बरकरार
एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट ने मैक्लोडगंज के एक व्यक्ति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अभियुक्त को बिना लाइसेंस के एलोपैथी दवाएं रखने और बेचने के दोषी पाया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं और कठोर सजा आवश्यक है।

