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हिमाचल प्रदेश सरकार: चंडीगढ़ और कांगड़ा के पास बनेंगी दो विशाल सैटेलाइट टाउनशिप, राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी राहत

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के विकास के लिए एक बड़ी योजना लेकर आई है। सरकार चंडीगढ़ के पास और कांगड़ा में दो नई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करेगी। इनका नाम ‘हिम चंडीगढ़’ और कांगड़ा टाउनशिप रखा जा सकता है। यह परियोजना राज्य को आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसकी जानकारी दी है।

इन टाउनशिप को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य शहरों का सुनियोजित विकास करना है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में आधुनिक रिहायशी और खुदरा स्थानों की कमी है। यह परियोजना इस कमी को दूर करने में मदद करेगी। निजी डेवलपर्स इन क्षेत्रों में ऊंची आवासीय इमारतें और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाएंगे।

मुख्यमंत्री सुक्खू के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार के पास पहले से ही अधिकांश जमीन है। यह जमीन ज्यादातर जंगल की है। बाकी बची जमीन का अधिग्रहण आसान होगा। सरकार लैंड-पूलिंग मॉडल का उपयोग करेगी।

गुरुग्राम और नोएडा की तर्ज पर विकसित होंगी टाउनशिप

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह राज्य में पहला ऐसा प्रयास है। इन टाउनशिप को गुरुग्राम और नोएडा के पैटर्न पर विकसित किया जाएगा। अधिग्रहण के बाद जमीन के प्लॉट निजी डेवलपर्स को नीलाम किए जाएंगे। इससे राज्य की आय में वृद्धि होगी।

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हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी इन परियोजनाओं का नेतृत्व करेगी। प्रत्येक टाउनशिप का कुल क्षेत्रफल लगभग बारह हज़ार पांच सौ एकड़ रखा गया है। इन विशाल परियोजनाओं के लिए अभी भी एक तिहाई जमीन अधिग्रहित की जानी बाकी है।

कांगड़ा टाउनशिप हवाई अड्डे से जुड़ेगी

कांगड़ा के पास बनने वाली टाउनशिप को कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार से जोड़ा जाएगा। इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगा।

वहीं चंडीगढ़ के पास बनने वाली ‘हिम चंडीगढ़’ टाउनशिप पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित होगी। यह बद्दी-शीतलपुर इलाके में विकसित की जाएगी। इसका लाभ दोनों राज्यों के निवासियों को मिलेगा।

पहले भी हुई थी कोशिश, लेकिन विरोध के कारण रुक गई थी परियोजना

इससे पहले भी राज्य ने एक सैटेलाइट टाउनशिप बनाने की कोशिश की थी। साल 2014 में शिमला से पंद्रह किलोमीटर दूर जथिया देवी में टाउनशिप का प्रस्ताव था। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के कारण यह परियोजना शुरू नहीं हो पाई।

ग्रामीणों का तर्क था कि परियोजना में उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण शामिल है। इस बार सरकार इस मुद्दे से बचने की कोशिश कर रही है। नई परियोजनाओं के लिए अधिकांश जमीन सरकार के पास ही है।

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राज्य के वित्तीय संकट में मिल सकती है राहत

यदि यह परियोजना सफल होती है तो राज्य को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है। हिमाचल प्रदेश इस समय भारी कर्ज और नकदी संकट से जूझ रहा है। सरकार ने खर्चों में कटौती और सब्सिडी कम करने के कदम उठाए हैं।

फिर भी सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए राज्य को उधार लेना पड़ रहा है। टाउनशिप से मिलने वाली आय इस स्थिति को सुधारने में मददगार साबित हो सकती है। यह एक दीर्घकालिक आर्थिक समाधान हो सकता है।

सरकार तीसरी टाउनशिप पर भी विचार कर रही है। हालांकि अभी इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वर्तमान में सरकार की पूरी कोशिश इन दो परियोजनाओं को शुरू करने पर केंद्रित है।

इन टाउनशिप के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद दोनों ही समय में लोगों को काम मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के शहरी परिदृश्य को बदल सकती है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह टाउनशिप युवाओं और पेशेवरों को आकर्षित करेंगी। इससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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