Himachal News: हिमाचल प्रदेश में अन्य विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस बुलाए जाने का मामला गरमा गया है। प्रदेश वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों से आंकड़े मांगे हैं। 22 जनवरी को आयोजित होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। इस बैठक में राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव शामिल होंगे।
इस बैठक में उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के अन्य विभागों में कार्यरत रहने पर विस्तार से चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में इस मसले पर आवश्यक निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। राज्य में सैकड़ों कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने मूल विभाग के बजाय दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं।
वित्त विभाग इस बात का आकलन करना चाहता है कि कितने कर्मचारी अपने कैडर से बाहर कार्यरत हैं। साथ ही इस स्थिति के पीछे के कारणों का भी पता लगाया जाएगा। विभाग यह भी जानना चाहता है कि क्या मूल विभागों में रिक्त पद मौजूद हैं और वहां कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकता क्या है।
मानव संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
राज्य के कई विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी बताई जा रही है। वहीं कुछ विभागों में जरूरत से ज्यादा स्टाफ तैनात है। इसी असंतुलन के चलते कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया गया था। अब वित्त विभाग इस पूरी व्यवस्था की समग्र समीक्षा कर रहा है।
इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य मानव संसाधनों का बेहतर और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना है। प्रत्येक विभाग को भेजे जाने वाले ब्योरे में कर्मचारी का नाम, पद और मूल विभाग का उल्लेख करना होगा। वर्तमान तैनाती विभाग, तैनाती अवधि और कारणों का स्पष्ट ब्योरा भी देना अनिवार्य होगा।
इन आंकड़ों के आधार पर सरकार भविष्य में स्थानांतरण, समायोजन और नई भर्तियों को लेकर नीति निर्धारण कर सकती है। इससे एक नई नीति लागू होने की भी संभावना है। इस कवायद का असर प्रदेश के करीब 1.90 लाख सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
बड़े विभागों में कर्मचारियों की संख्या
राज्य में 35 हजार आउटसोर्स कर्मचारी भी कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग में सबसे अधिक 78,396 कर्मचारी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। लोक निर्माण विभाग में 19,627 कर्मचारी कार्यरत हैं। पुलिस विभाग में 17,541 कर्मचारी तैनात हैं।
जलशक्ति विभाग में 15,609 कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में 13,415 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न विभागों में कर्मचारियों का वितरण असमान है। इसी असमानता को दूर करने के लिए यह कवायद शुरू की गई है।
आगामी बैठक में सभी विभागों के प्रमुख अपने-अपने विभाग की स्थिति से अवगत कराएंगे। वित्त विभाग इन सभी रिपोर्ट्स का अध्ययन करेगा। इसके बाद ही अगले कदम के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रशासनिक कार्य प्रणाली को और अधिक कारगर बनाना है।

