Himachal Pradesh News: राज्य सरकार कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास देने के लिए बड़ी पहल कर रही है। 132 करोड़ रुपये की लागत से अलग-अलग जिलों में 13 नए महिला छात्रावास बनाए जाएंगे। यह कदम महिला सशक्तिकरण और उनकी कार्यस्थल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह जानकारी देते हुए शिशु लिंगानुपात में सुधार का भी उल्लेख किया।
इन नए छात्रावासों का निर्माण सोलन, पालमपुर, बद्दी और नागरोटा-बगवां जैसे औद्योगिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में किया जाएगा। इसका मकसद रोजगार या प्रशिक्षण के सिलसिले में शहर आने वाली महिलाओं को सस्ता और सुरक्षित रहने का ठिकाना देना है। सरकार का लक्ष्य है कि आवास की चिंता के बिना महिलाएं आत्मनिर्भर बनने पर ध्यान दे सकें।
आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगा प्री-स्कूल का दर्जा
मुख्यमंत्रीने बताया कि राज्य के सभी 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों को अब ‘आंगनबाड़ी सह प्री-स्कूल’ में तब्दील किया जा रहा है। इन केंद्रों पर तीन से छह साल के बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। इस नई व्यवस्था का मकसद बच्चों की पढ़ाई की नींव को मजबूत करना है।
इस बदलाव के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के जरिए उन्हें नए शैक्षणिक तरीकों से लैस किया जाएगा। इस पहल से बच्चों का शुरुआती विकास बेहतर होगा और वे प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार होंगे।
अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं के लिए सुख आश्रय योजना
सरकार कीसुख आश्रय योजना का भी जिक्र किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया। इस योजना के तहत अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं की परवरिश और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार लेती है। उनके आत्मनिर्भर बनने तक हर जरूरी मदद दी जाती है।
योजना का लक्ष्य है कि समाज के इन वंचित वर्गों को हर तरह का सहारा मिले। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान आएगा।
शिशु लिंगानुपात में हुआ सुधार, बेटियों के लिए योजनाएं
बीतेतीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 947 से बढ़कर 964 हो गया है। यह सुधार बेटियों के प्रति समाज की सोच में बदलाव का संकेत देता है। मुख्यमंत्री ने इसे सरकार की गंभीर कोशिशों का नतीजा बताया। लिंगानुपात में सुधार एक सकारात्मक रुझान है।
इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में जन्मी बेटियों के लिए 25,000 रुपये जमा किए जाते हैं। साथ ही माता-पिता दोनों का दो-दो लाख रुपये का जीवन बीमा भी होता है। यह राशि बेटी की उम्र 18 साल होने पर या अधिकतम 27 साल की उम्र तक मिल सकती है।
इस योजना ने ‘बेटी है अनमोल’ जैसी पहलों को और मजबूती दी है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को एक उत्सव और सुरक्षित भविष्य का आश्वासन बनाना है। वित्तीय सहायता से परिवारों पर बोझ कम होगा और बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित होगी।
महिला सुरक्षा और बाल विकास की ये सभी योजनाएं राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं। इन पहलों से न केवल महिलाओं और बच्चों का जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि समग्र सामाजिक विकास भी तेज होगा। सरकार का दावा है कि यह सब समावेशी विकास की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

