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हिमाचल प्रदेश: आपदा में लापता लोगों के परिजनों को अब नहीं करना पड़ेगा 7 साल का इंतजार, जल्द मिलेंगे मृत्यु प्रमाण पत्र

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों को अब सात वर्ष तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदाओं में लापता लोगों के मामलों में वर्ष 2023 के दिशा-निर्देश लागू होंगे।

इस वर्ष आपदा में 46 लोग अभी भी लापता हैं। उनके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह निर्देश केवल 2025 की मानसून आपदाओं तक सीमित रहेंगे। भविष्य की आपदाओं के लिए नई मंजूरी आवश्यक होगी।

नई प्रक्रिया के तहत कार्यवाही

जिन व्यक्तियों के शव मिल चुके हैं, उनके मामलों में सामान्य प्रक्रिया से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। लापता व्यक्तियों के मामलों में उत्तराखंड के वर्ष 2021 के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यवाही होगी। इन निर्देशों के तहत 30 दिनों में दावों और आपत्तियों का समाधान किया जाएगा।

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प्रदेश के सभी जिलों में परगना मैजिस्ट्रेट या उप जिलाधिकारी को अधिकारी नामित किया गया है। जिलाधिकारी को अपीलीय अधिकारी बनाया गया है। इससे प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। परिजनों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।

मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया

लापता व्यक्तियों की सूची समाचार पत्रों और सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 30 दिनों का इंतजार किया जाएगा। इस अवधि में सभी दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। यदि 30 दिनों में कोई दावा या आपत्ति नहीं मिलती है तो मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

मृत्यु का पंजीकरण मृत्यु स्थल पर किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी किया है। जिला रजिस्ट्रार को इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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मानसून आपदा से हुई क्षति

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार मानसून में 427 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 242 मौतें बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुई हैं। भूस्खलन, बाढ़ और बिजली गिरने से कई लोगों ने जान गंवाई। 481 लोग घायल हुए हैं और 8,858 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।

आपदा से 2,478 मवेशियों की मौत हुई है। 26,955 पोल्ट्री पक्षी भी मारे गए हैं। 584 दुकानें और 7,048 पशुशालाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। प्रदेश को पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सरकार राहत और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई है।

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