Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। स्क्रीनिंग कमेटी की एक रिपोर्ट ने विभाग के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला करोड़ों रुपये की जीआई पाइप की खरीद से जुड़ा है। इस हिंदी न्यूज़ ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मार्च 2025 में पाइप सप्लाई के दौरान नियमों की जमकर अनदेखी की गई। आपूर्तिकर्ता कंपनी पर फर्जी ई-वे बिल पेश करने का शक गहरा गया है।
करोड़ों की पाइप और फर्जी कहानी
विभागीय रिपोर्ट के 22 पन्नों में इस गड़बड़ी का कच्चा-चिट्ठा है। वर्ष 2024-25 में मैसर्स एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड को पाइप सप्लाई का जिम्मा मिला था। यह ऑर्डर करीब 36.77 करोड़ रुपये का था। कंपनी को कुल 4,770 मीट्रिक टन पाइप देनी थी। इसमें से 10.19 लाख रुपये की पाइप बड़सर डिवीजन भेजी गई। हैरानी की बात यह है कि इसकी सूचना सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को नहीं दी गई। यह सब गुपचुप तरीके से किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
ट्रक बदला पर सबूत है गायब
कंपनी ने अपनी सफाई में अजीब तर्क दिया है। उन्होंने दावा किया कि एक ट्रक (HR 39F7899) आनी और बड़सर के लिए माल ले जा रहा था। पहाड़ी रास्ता होने के कारण ट्रक आगे नहीं जा सका। इसलिए बड़सर का सामान दूसरे ट्रक (HP-72B 0655) में शिफ्ट किया गया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का कोई वीडियो सबूत नहीं है। मौके पर विभाग का कोई अधिकारी भी मौजूद नहीं था। जबकि नियमों के मुताबिक यह सब निगरानी में होना चाहिए था। यह लापरवाही दस्तावेजों में हेराफेरी की ओर इशारा करती है। यह हिंदी न्यूज़ अब जांच का विषय बन गई है।
उप मुख्यमंत्री ने की बैठक
इस पूरे मामले का खुलासा स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में हुआ। यह अहम बैठक 18 दिसंबर को हुई थी। इसकी अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने की। बैठक में वित्त और कानून विभाग के बड़े अफसर भी मौजूद थे। हालांकि, जब जल शक्ति विभाग के मौजूदा सचिव अभिषेक जैन से सवाल किया गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है। फिलहाल विभाग में इस खुलासे से हड़कंप मचा हुआ है।
