Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए फंड न देने पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि हालात बहुत दयनीय हो चुके हैं। केंद्र सरकार परियोजनाओं के लिए 90 फीसदी पैसा दे रही है। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश सरकार अपना 10 फीसदी हिस्सा भी देने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार का यह रवैया विकास कार्यों में बड़ी बाधा बन रहा है।
न्यायिक परिसर के लिए नहीं मिल रहा पैसा
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। यह मामला सिरमौर जिले की पच्छाद तहसील का है। यहां सराहां में न्यायिक परिसर का निर्माण होना है। हिमाचल प्रदेश सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। कोर्ट ने कहा कि सरकार का रवैया बुनियादी ढांचे के प्रति सौतेला लग रहा है। सरकार पर्याप्त धन आवंटित नहीं कर रही है। इस कारण हाई कोर्ट को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
ठेकेदार को नहीं मिली पूरी राशि
सुनवाई के दौरान एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने कोर्ट को अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 50 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 4.19 करोड़ रुपये है। ठेकेदार को 18 महीने में काम पूरा करना है। काम पूरा करने की समय सीमा 5 जून 2026 तय की गई है। रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च 2025 में केवल 15 लाख रुपये ही मिले थे। इससे निर्माण कार्य की गति प्रभावित हो रही है।
मुख्य सचिव को भेजा गया आदेश
कोर्ट ने पाया कि याचिका दोबारा खुलने पर ही सरकार जागी। याचिका दायर होने के बाद 21 नवंबर 2025 को राशि जारी करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय योजनाओं का हाल बुरा है। राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। खंडपीठ ने इस आदेश की कॉपी मुख्य सचिव को भेजने को कहा है। इससे उन्हें वित्त और गृह विभाग के खराब रवैये का पता चल सकेगा।

