Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग के बीच पंचायत सीमाओं में बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंचायती राज विभाग ने चुनाव आयोग की सत्रह नवंबर की अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है। सरकार का कहना है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित किए बिना आचार संहिता लागू करना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
सरकार ने बुधवार को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि पंचायतों की सीमाएं बदलने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। चुनाव आयोग का इस पर रोक लगाना कानूनी रूप से उचित नहीं माना जा सकता। इस रोक के कारण हजारों लोगों की मांगें अगले जनगणना चक्र तक लटक सकती हैं।
अधिसूचना में क्या है
राज्य चुनाव आयोग नेसत्रह नवंबर को अधिसूचना जारी कर आदर्श आचार संहिता की धारा 12.1 लागू कर दी। इसके तहत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पंचायत की सीमा, संरचना या वर्गीकरण में बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह रोक चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद लागू होनी चाहिए।
पंचायती राज विभाग ने इस कदम को प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है। विभाग के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 243-सी(1) राज्य विधानमंडल को पंचायतों की संरचना तय करने का अधिकार देता है। इसी आधार पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 1994 में पंचायती राज अधिनियम पारित किया था।
सरकार के तर्क
सरकार नेचुनाव आयोग को भेजे पत्र में कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं। प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 अभी भी लागू है। कई इलाकों में वर्षा, भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति के चलते सामान्य स्थिति पूरी तरह स्थापित नहीं हुई है।
जब तक आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रतिबंध हट नहीं जाते, तब तक पंचायत चुनाव की घोषणा करना संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव करवाना व्यावहारिक नहीं होगा। पहाड़ी इलाकों में संपर्क मार्ग अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं।
जनगणना का मुद्दा
रजिस्ट्रार जनरल एवंजनगणना आयुक्त भारत के अनुसार स्थानीय निकायों की सीमाएं पहली जनवरी 2026 से फ्रीज हो जाएंगी। इस तारीख के बाद कोई भी पंचायत, नगर निकाय या स्थानीय निकाय की सीमाएं बदली नहीं जा सकेंगी। यह स्थिति अगले जनगणना चक्र तक बनी रहेगी।
सरकार का कहना है कि यदि अभी सीमांकन कार्य रोका गया तो हजारों लोगों के क्षेत्र पुनर्गठन, नई पंचायतों की मांग और वर्गीकरण परिवर्तन जैसी प्रक्रियाएं वर्षों के लिए रुक जाएंगी। इससे स्थानीय विकास के कार्यों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
आगे की कार्रवाई
पंचायतीराज विभाग ने चुनाव आयोग से अधिसूचना वापस लेने का अनुरोध किया है। विभाग का मानना है कि यह मामला संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। सरकार अपने अधिकार क्षेत्र को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद संवैधानिक संकट का रूप ले सकता है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और जल्द ही कोई समाधान निकलने की उम्मीद है।

