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हिमाचल प्रदेश: 20 जनवरी को पंचायत चुनाव की रूपरेखा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक

Himachal Pradesh News: राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर चर्चा के लिए एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक 20 जनवरी को होगी। उच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर इस बैठक में चुनाव की संभावित तिथि और तैयारियों पर फैसले होंगे। बैठक से पहले पंचायती राज विभाग के सचिव का अवकाश पर जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।

पंचायतीराज संस्थाओं के वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इसलिए नए चुनाव की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होना जरूरी है। निर्वाचन आयोग की यह बैठक चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। सभी हितधारक इस बैठक के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय नेपंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले करवाने का आदेश दिया है। साथ ही आयोग को 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूचियों की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इन्हीं आदेशों के अनुपालन के लिए यह बैठक बुलाई गई है।

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बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व केके पंत और प्रधान सचिव शहरी विकास भी होंगे। पंचायती राज विभाग के सचिव के अवकाश पर होने से विभाग की ओर से कोई अन्य अधिकारी बैठक में भाग लेगा।

चुनाव की रूपरेखा पर होगा मंथन

बैठक कीअध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची करेंगे। इस बैठक में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम, मतदान केंद्रों की व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों की सीमाओं या संरचना में बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। आयोग का मानना है कि ऐसे बदलाव चुनाव प्रक्रिया में देरी का कारण बन सकते हैं। आयोग चाहता है कि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सके।

सरकार और आयोग के विचारों में अंतर

राज्य सरकार नई पंचायतोंके गठन या मौजूदा पंचायतों के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखती है। वहीं निर्वाचन आयोग इस प्रकार के परिवर्तनों से बचना चाहता है। आयोग केवल जिला परिषद वार्डों में ही आवश्यक समायोजन की बात करता है।

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यह मतभेद चुनाव प्रक्रिया की समयसीमा को प्रभावित कर सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई बदलाव होते हैं तो 28 फरवरी की समयसीमा का पालन किया जाएगा। इसका उद्देश्य न्यायालय के आदेशानुसार चुनाव करवाना है।

पंचायत चुनाव स्थानीय स्वशासन की नींव मजबूत करते हैं। ये चुनाव ग्रामीण विकास और योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनका समय पर होना जनहित में अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

बैठक के परिणामों से पंचायत चुनाव का रास्ता साफ होगा। राज्य के राजनीतिक दल भी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की घोषणा की जा सकती है। पूरा राज्य इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ओर देख रहा है।

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