Himachal News: हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने पदोन्नति, वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। इसके लिए शीघ्र ही सभी श्रेणियों के कर्मचारियों की एक महाबैठक बुलाई जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने एक कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में यह महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार प्रत्येक कर्मचारी की न्यायसंगत मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेगी। पंप ऑपरेटरों को विभाग की रीढ़ बताते हुए उनकी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिए जाने का संकेत दिया गया।
मुकेश अग्निहोत्री ने घोषणा की कि पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति में आने वाली तकनीकी अड़चनों को जल्द ही दूर किया जाएगा। सरकार ने विभाग में रिक्त पदों और पदोन्नति कोटे की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इससे लंबित प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कर्मचारी कल्याण से जुड़ी फाइलों को अनावश्यक रूप से न रोका जाए। अधिकारियों को कर्मचारियों की समस्याओं का विस्तृत ब्योरा तैयार करने के आदेश भी दिए गए हैं। इसका लक्ष्य एक चरणबद्ध तरीके से सभी मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना है।
महाबैठक में होगी सभी मुद्दों पर चर्चा
आगामीमहाबैठक में पदोन्नति, वेतन विसंगति और कार्यस्थल की चुनौतियों सहित हर विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक के दौरान ही समाधान की रूपरेखा तैयार की जाएगी। वह स्वयं इस पूरी प्रतिक्रिया प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इस पहल से हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है। ये कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। सरकार का यह कदम उनके मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उच्च अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे कर्मचारियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। इससे समस्याओं के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी।
पंप ऑपरेटरों की भूमिका को मिली मान्यता
उपमुख्यमंत्रीने विशेष रूप से पंप ऑपरेटरों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी जल आपूर्ति तंत्र का एक अभिन्न अंग हैं। इनकी सेवाओं के बिना विभाग का कामकाज प्रभावित हो सकता है।
इसीलिए इनकी समस्याओं को सबसे पहले दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। पदोन्नति के मामले में तकनीकी बाधाओं को दूर करने का वादा इसी दिशा में एक कदम है। इससे कर्मचारियों के करियर में आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा।
सरकार का यह फैसला शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी दर्शाता है। प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर कर्मचारी हितों को सुनिश्चित करना एक सकारात्मक पहल है। इससे विभाग के कामकाज में दक्षता आने की भी उम्मीद की जा सकती है।
कर्मचारी नेताओं ने इस घोषणा का स्वागत किया है। उनका मानना है कि सीधे उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में बुलाई गई बैठक ठोस नतीजे लाएगी। अब सभी की नजरें जल्द बुलने वाली इस महाबैठक पर टिकी हैं।

