Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से धर्मशाला में शुरू हो रहा है। यह सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा और अब तक का सबसे लंबा सत्र होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस सत्र के लिए पूरी तैयारी कर ली है। विधायकों ने सदन में चर्चा के लिए 600 से अधिक प्रश्न पेश किए हैं।
इन सभी प्रश्नों को विधानसभा सचिवालय को ऑनलाइन प्राप्त हुआ है। अब इन्हें संबंधित विभागों के पास जवाब के लिए भेजा जा रहा है। विधानसभा के अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादातर सवाल आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों से जुड़े हुए हैं। इससे पता चलता है कि यह सत्र प्राकृतिक आपदाओं से निपटने पर केंद्रित रहेगा।
पिछली बारिश के मौसम में प्रदेश को प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसी वजह से ज्यादातर विधायकों ने अपने क्षेत्रीय मुद्दों को इन सवालों के जरिए उठाया है। भूस्खलन, भारी बारिश से हुए नुकसान और राहत पैकेज के वितरण पर सबसे अधिक सवाल पूछे गए हैं।
आपदा प्रबंधन और मरम्मत कार्य होगा चर्चा का मुख्य बिंदु
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का मुद्दा भी इस सत्र में प्रमुखता से उठेगा। बारिश के बाद प्रदेश की सड़कों की हालत काफी खराब हो गई है। लोगों को रोजाना यातायात में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक इन समस्याओं को सरकार के सामने रखेंगे।
सत्र की तैयारियों को लेकर विधानसभा प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। धर्मशाला के तपोवन में सत्र आयोजित किया जाएगा। यह स्थान पहाड़ों के बीच स्थित है और यहां की सुरम्य वादियों के बीच विधायक जनहित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
सरकार की ओर से इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में सरकार ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र के एजेंडे पर चर्चा की जा चुकी है। सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेगी।
विपक्ष की भूमिका इस सत्र में बेहद अहम होगी। विपक्षी दल सरकार पर आपदा प्रबंधन में कोताही बरतने का आरोप लगा सकते हैं। वे राहत कार्यों में देरी और सड़क मरम्मत में हुई लापरवाही को मुद्दा बना सकते हैं। सदन में जोरदार बहस होने की उम्मीद है।
राज्य के विकास और जनता के मुद्दे होंगे केंद्र में
यह सत्र दस दिनों तक चलने वाला है जो इसे विशेष बनाता है। इतने लंबे सत्र में विधायकों को मुद्दों पर विस्तार से बोलने का मौका मिलेगा। जनता की समस्याओं को गहराई से उठाया जा सकेगा। सरकार को भी अपने कार्यों और योजनाओं के बारे में विस्तार से बताने का अवसर मिलेगा।
सत्र के दौरान स्थानीय मुद्दों के अलावा राज्यव्यापी समस्याओं पर भी चर्चा होगी। बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दे भी उठाए जा सकते हैं। विधायकों ने इन विषयों पर भी सवाल तैयार किए हैं। सरकार इन सभी मुद्दों पर अपना पक्ष रखेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सत्र में कई महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणाएं भी हो सकती हैं। सरकार आपदा पीड़ितों के लिए नई राहत योजनाएं ला सकती है। सड़कों की मरम्मत के लिए विशेष बजट की घोषणा भी की जा सकती है। पूरा प्रदेश इस सत्र की proceedings पर नजर रखेगा।

