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हिमाचल पंचायत चुनाव: क्या 6 महीने के लिए टल जाएगा इलेक्शन? हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इस पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। राज्य सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। जयराम सरकार ने अदालत से चुनाव करवाने के लिए कम से कम छह महीने का वक्त मांगा है। सरकार का कहना है कि वे चुनाव टालना नहीं चाहते, लेकिन मौजूदा हालात में समय की जरूरत है।

सरकार ने क्यों मांगा 6 महीने का समय?

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चुनाव टालने की उनकी कोई गलत मंशा नहीं है। प्रदेश में नई पंचायतों, पंचायत समिति और नगर निगम की परिसीमा (Delimitation) के गठन का काम अभी चल रहा है। सीमा निर्धारण की यह प्रक्रिया पूरी होने में वक्त लगेगा। ऐसे में तय समय पर चुनाव करवाना प्रशासन के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी वजह से सरकार ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है।

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याचिकाकर्ताओं ने दी चुनाव आयोग की दलील

इससे पहले मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील ने अदालत में जोरदार बहस की थी। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने पहले ही सभी डीसी को चुनाव सामग्री बांटने के आदेश दे दिए थे। आयोग ने 17 नवंबर को राज्य में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट भी लागू कर दिया था। वकील ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए चुनाव समय पर करवाना सरकार की जिम्मेदारी बनती है।

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परिसीमा विवाद और अगली सुनवाई

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार आपदा और जिला परिषद की परिसीमा का बहाना बनाकर चुनाव टाल रही है। उनका कहना है कि नई पंचायतों का गठन चुनाव के बाद भी जारी रह सकता है। वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया कि परिसीमा को लेकर जारी अधिसूचना को एक अन्य खंडपीठ ने रद्द कर दिया था। लोगों को 10 जनवरी तक आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव कराने में छह महीने लग सकते हैं। मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ कर रही है।

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