संयुक्त किसान मोर्चा प्रदेश में करेगा प्रदर्शन का आगाज, 10 दिन में सौ से अधिक बैठकें और 13 को ब्लॉक स्तर पर होगा प्रदर्शन

बागवानों को मंडियों में सेब के सही दाम न मिलने और संकट के समय सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ संयुक्त किसान मंच शुक्रवार से आंदोलन का बिगुल फूंकने जा रहा है। 10 दिन के भीतर सेब उत्पादक क्षेत्रों में पंचायत और गांव स्तर पर सौ से अधिक बैठकें करने की योजना है। पहले बैठक आज (शुक्रवार) को ठियोग में होगी।

इसके अलावा थानेधार, टापरी, निरमंड, रामपुर, आनी, कोटखाई, जुब्बल और रोहड़ूू में बैठकों की तिथियां तय कर दी हैं। 13 सितंबर को उपमंडल स्तर पर प्रदर्शन होगा।

सोमवार को शिमला में हुई बैठक में 17 किसान संगठनों ने 13 सितंबर को प्रदर्शन करने का फैसला लिया था। प्रदर्शन से पहले किसान-बागवानों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं पूछी जाएंगी और आंदोलन के आगामी स्वरूप को लेकर राय भी लेंगे। बैठकों के लिए संयुक्त किसान मंच ने 32 सदस्यीय समिति गठित की है। समिति के सदस्य आज से पंचायत और गांव स्तर पर बैठकों में भाग लेंगे। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि 32 साल बाद प्रदेश के किसान-बागवान एक मंच पर इकट्ठे हो रहे हैं।

मंच को करीब 20 संगठनों का समर्थन मिल चुका है। मंच के सदस्यों का कहना है कि मंडियों में सेब के रेट गिरने से बागवानों की लागत भी नहीं निकल पा रही। कारपोरेट कंपनियां पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। प्रीमियम सेब पिछले साल 88 रुपये खरीदा गया जबकि इस साल 72 रुपये रेट निर्धारित किए हैं। हरीश चौहान ने बताया कि पहले चरण में शिमला, कुल्लू, किन्नौर और मंडी जिला के सेब उत्पादकों की लड़ाई लड़ी जा रही है। दूसरे चरण में प्रदेश के अन्य राज्यों के किसानों के मुद्दे भी जोरशोर से उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने बातचीत को नहीं बुलाया
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि 30 अगस्त की बैठक से पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव के माध्यम से मुलाकात का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री स्वयं भी किसान परिवार से आते हैं बावजूद इसके बागवानों की समस्याएं सुनने के लिए नहीं बुलाया।

कब कहां होंगी बैठकें
ठियोग 3 सिंतबर
रोहडू 6 सितंबर
थानेदार 7 सिंतबर
टापरी 7 सितंबर
कोटखाई 7 सितंबर
जुब्बल 8 सितंबर
निरमंड 8 सिंतबर
रामपुर 9 सिंतबर
आनी 10 सिंतबर

यह है मांगें
1. मंडी मध्यस्थता योजना के तहत ए,बी,सी ग्रेड सेब 60, 44 और 24 रुपये प्रतिकिलो खरीदा जाए।
2. परदे में सेब की बोली बंद कर खुली बोली की व्यवस्था करें, बागवानों से मनमानी काट बंद हो।
3. आढ़तियों और लदानियों के पास बकाया पैसे का तुरंत भुगतान हो।
सेब की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कार्टन और ट्रे की बढ़ी कीमतें वापस हों।
4. प्राकृतिक आपदा से सेब की फसल को हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए।
5. बढ़ती महंगाई और मालभाड़े की बढ़ी दरें वापस ली जाएं।
6. वजन के हिसाब से सेब सहित अन्य फसलें बेचने की व्यवस्था करें।
7. एचपीएमसी, हिमफेड द्वारा बीते सालों में खरीदे सेब के पैसे का तुरंत भुगतान करें।
8. खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक दवाओं पर सब्सिडी बहाल करें।
9. कृषि बागवानी के उपकरणों एंटी हेलनेट, स्प्रेयर, टिलर की सब्सिडी तुरंत जारी की जाए।

error: Content is protected !!