व्यापक जनहित नही तो आरटीआई में नही दी जा सकती ट्रेड सीक्रेट की जानकारी

अगर व्यापक जनहित मौजूद नहीं है तो आरटीआई में ट्रेड सीक्रेट की जानकारी नहीं दी जा सकती है। यह टिप्पणी राज्य सूचना आयोग ने की है और इस संबंध में अन्य सूचनाएं देने के आदेश जारी किए हैं।

दरअसल, शिकायतकर्ता ने निर्यात परमिटों के बारे में सूचना मांग ली थी। बाद में यह मामला राज्य सूचना आयोग में पहुंचा।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की आरटीआई अदालत में इस संबंध में एक अपील की गई। इसमें सीडार एवं देवदार वुड ऑयल इंडस्ट्री के बारे में जानकारी मांगी गई जो बल्ह में है। इसमें राज्यस्तरीय स्वीकृति समिति के आदेशों के अलावा इसके 2017-18 से लेकर 2020-21 के ट्रेड परमिटों के बारे में भी जानकारी चाही गई।

अपीलकर्ता ने कहा कि जानबूझकर इस सूचना को उन्हें नहीं दिया गया। जनसूचना अधिकारी यानी संबंधित डीएफओ ने आयोग को बताया कि यह सूचना थर्ड पार्टी से संबंधित है। थर्ड पार्टी ने इस तरह की सूचना शेयर करने से इंकार किया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सूचना आयोग ने टिप्पणी की कि यह सूचना आरटीआई एक्ट की धारा 4 के क्लॉज आठ से संबंधित है।

यह निर्यात परमिट आदि से संबंधित है। जनसूचना अधिकारी के पास किसी भी सूचना के बारे में विचार करने का अधिकार है कि यह ट्रेड सीक्रेट का भाग है कि नहीं, क्योंकि निर्यात पार्टियों के नाम ट्रेड सीक्रेट का हिस्सा हैं। इसके अलावा अन्य सूचना शिकायतकर्ता को मुफ्त में दी जाए। आयोग को इस संबंध में एक अनुपालना रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए।

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