संविधान और कानून की शवयात्रा निकालने वालों ने किया धारा 144 का उल्लंघन, कई लोगों पर एफआईआर दर्ज

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन सालों से जातिवाद को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। जहां स्वर्ण संगठन बेतुकी और असंवैधानिक मांगों को लेकर चर्चा में है वही दलित संगठनों ने भी कई अधिकारियों के माध्यम से विरोध दर्ज करवाया है। लेकिन आज तक किसी भी असंवैधानिक कार्य कर खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नही की गई। जिससे साफ झलकता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार और पुलिस प्रदेश में कानूनी कार्यवाही ना करके जातिवाद को बढ़ावा दे रही है।

ऊना में धारा 144 का उल्लंघन

जानकारी के मुताबिक ऊना जिले में दलित संगठन भीम आर्मी भारत एकता मिशन की ओर से उपायुक्त राघव शर्मा को ज्ञापन देकर मांग की गई थी कि ऊना जिले में भारतीय कानून और संवैधानिक व्यवस्था की शवयात्रा पर रोक लगाई जाए। लेकिन उसके बावजूद उपायुक्त राघव शर्मा ने असामाजिक तत्वों के असंवैधानिक कृत्यों पर किसी तरह की कोई रोक नही लगाई। बल्कि भारतीय कानून और संवैधानिक प्रावधानों की अर्थी की रक्षा करते पुलिस कर्मी दिखाई दिए।

आरक्षण व भारतीय कानून के खिलाफ प्रदर्शन में पुलिस कर्मी

जानकारी के मुताबिक पिछले कल ऊना में राज्यपाल के दौरे को लेकर धारा 144 लगाई गई थी। जिसके चलते दलित संगठनों के इक्कठा होने पर पर रोक लगा दी गई। लेकिन संविधान और भारतीय कानून की अर्थी निकालने वालों पर कोई रोक नही लगाई गई। बल्कि कई पुलिस अधिकारी उनकी सुरक्षा में खड़े नजर आए। कोरोना काल में लोगों द्वारा 144 के उल्लंघन पर टांगे तोड़ देने वाली हिमाचल की पुलिस की यह करतूत कई तरह के सवाल पैदा करती है। जिसमें सबसे बड़ा सवाल है कि क्या हिमाचल पुलिस उपद्रवियों, संविधान विरोधियों और भारतीय कानून की अर्थी निकालने वालों के साथ है?

संविधान और भारतीय कानून की शवयात्रा में साथ चलते पुलिस कर्मी

उधर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, धारा 144 के उल्लंघन के चलते कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक यह लोग शवयात्रा लेकर मैहतपुर बाजार से 300-350 की संख्या में गाड़ियों सहित नारे लगाते हुए निकले। इस कारण पुलिस ने रुमित सिंह ठाकुर, भूपेंद्र राणा, मदन ठाकुर, गौरव ठाकुर, साहिल आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 में एफआईआर दर्ज की है और जांच जारी है।

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