हिमाचल में सेब के मूल्यों को लेकर होगा दिल्ली जैसे आंदोलन, राकेश टिकैत करेंगे नेतृत्व

शिमला. दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन की तर्ज पर अब हिमाचल में भी एक बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है. किसान और बागवान संगठनों ने अब सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है.

सेब के गिरते दामों और अन्य मुद्दों पर भाजपा, कांग्रेस और माकपा से जुड़े किसान संगठन एकजुट हो रहे हैं. इस बाबत सोमवार को संयुक्त किसान मंच के बैनर तले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बैठक भी हुई थी और सभी दलों के कुछ नेता, कार्यकर्ता और किसान-बागवान ने शामिल हुए थे. भाजपा से 32 वर्षों से जुड़े बागवान हरीश चौहान संयुक्त किसान मंच के संयोजक हैं और फल-फूल सब्जी उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं. बैठक में सहमति बनी हैं कि आंदोलन का आगाज 13 सितंबर से होगा.

दोबारा हिमाचल आएँगे टिकैत?
खास बात ये है कि इस आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत बड़ी भूमिका में होंगे. इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि वो कब इस आंदोलन में शामिल में होंगे, लेकिन इतना जरूर है कि राकेश टिकैत ने हिमाचल में होने वाले आंदोलन के लिए अपना समर्थन दिया है और हाल ही में टिकैत हिमाचल भी आए थे. माकपा विधायक और किसान नेता राकेश सिंघा ने इसकी पुष्टि की है. राकेश सिंघा ने कहा कि राकेश टिकैत से उनकी फोन पर बात हुई है. राकेश टिकैत ने अपना समर्थन दिया है.

कुल्लू या शिमला में आंदोलन
सिंघा ने कहा कि इस आंदोलन में मुख्य भूमिका में किसान होंगे और राकेश टिकैत भी महत्वपूर्ण भूमिका होंगे. जल्द ही कुल्लू या शिमला जिले में एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें टिकैत शामिल होंगे. सिंघा का कहना है कि उन्हें टिकैत ने 5 सितंबर को मुजफ्फरपुर में होने वाली महा पंचायत में शामिल होने का न्यौता भी दिया है. कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने इस आंदोलन का समर्थन किया है.

सेब के दामों पर क्या बोले थे सीएम
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर कह रहे हैं कि सरकार सेब के गिरते दामों पर चिंतित है. सरकार की ओर से क्या किया जा सकता है इस पर मंथन किया जा रहा है. साथ ही जो मोर्चा खड़ा हो रहा है. उस पर सीएम ने ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस इतना कहा कि कांग्रेस सरकार के समय में भी दाम इसी तरह गिरे थे. 13 सितंबर को किसान-बागवान तहसील, ब्लॉक और उपमण्डल स्तर पर प्रदर्शन करेंगे. सरकार के समक्ष मांगे रखीं जाएंगी, अगर सरकार मांगे नहीं मानती तो 26 सितंबर को बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा.

संयुक्त किसान मंच की ये हैं मांगें
1. प्रदेश में अदानी व अन्य कंपनियों तथा मण्डियों में किसानों के शोषण पर रोक लगाए व हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाए.
2. प्रदेश की विपणन मंडियों में एपीएमसी कानून को सख्ती से लागू किया जाए. मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डीडी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए, जिन किसानों भी से यह वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए.

3.किसानों के आढ़तियों व खरीददारों के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में एपीएमसी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए.
4.सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए.
5. प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा प्रदान राहत प्रदान करे.
6. बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए. प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य फसलें वजन के हिसाब से बेची जाएँ. HPMC और Himfed द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए.
7. खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए.
8. कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाए. बैठक में तय किया गया सरकार इन मांगों पर तुरंत स्वीकार कर किसानों को राहत प्रदान करे.

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