शिमला में है 10 हजार से ज्यादा अवैध भवन, कई मंजिलों वाली यह इमारते बरपा सकती है कहर

शिमला: राजधानी शिमला में करीबन 10 हजार से अधिक अवैध भवन हैं जो बिना नक्शे और अनुमति के बने हैं। इन भवनों का निर्माण नियमों को दरकिनार कर किया गया है, ऐसे में यह भवन कभी भी कहर बरपा सकते हैं। शिमला में लगातार असुरक्षित भवन निर्माण बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन अवैध निर्माण रोकने को लेकर कोई सख्त कार्रवाई अब तक नहीं कर पाया है। इसी का नतीजा है कि शहर में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर भवन मालिक अवैध निर्माण कर रहे हैं। पहाड़ियों को खोदकर यहां पर मकान बनाए जा रहे हैं।

शहर में 7 से 8 मंजिल के भवन बनाए गए हैं जबकि नियमों के तहत इतने मंजिल का निर्माण नहीं किया जा सकता है। एनजीटी के आदेशों के तहत शिमला में केवल अढ़ाई मंजिल का निर्माण ही किया जा सकता है लेकिन शहर में 1980 और 90 और इसके बाद के दशक में जो निर्माण हुआ है उसमें बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं, जो आज अवैध है और इनसे खतरा बना हुआ है।

शिमला शहर में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जिन्हें नगर निगम में 2006 में शामिल किया है। इससे पहले यह क्षेत्र साडा व पंचायत के अधीन आते थे, ऐसे में यहां पर लोगों ने 7 से 8 मंजिल का निर्माण कर लिया है जबकि साडा के तहत भी साढ़े 4 मंजिल से अधिक का भवन निर्माण नहीं किया जा सकता है। ऐसे में शिमला में आज तक ये भवन रैगुलर नहीं हो पाए हैं। इन भवनों से बरसात के मौसम में अनहोनी होने का खतरा बना रहता है। बारिश के कारण शिमला में कई बहुमंजिला भवन गिर चुके हैं, जबकि कई मकानों को अनसेफ घोषित किया जा चुका है लेकिन लोग अवैध निर्माण करने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिसका खमियाजा बरसात में लोगों को भुगतान भी पड़ रहा है।

शहर के समिट्री अप्पर सिमिट्री, संजौली, चक्कर, घौड़ाचौकी, कच्चीघाटी, शिवनगर, ढली व इत्यादि क्षेत्रों में बहुत अधिक असुरक्षित भवन निर्माण हो रहा है। यहां पर लोगों ने न तो सैटबैक छोड़े हैं और न ही चलने के लिए रास्ता, ऐसे में आपदा के समय इन क्षेत्रों में राहत कार्य करने के लिए भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां पर एक मकान दूसरे भवन के साथ सटा है जो अपने साथ आसपास के भवनों को भी नुक्सान पहुंचा रहा है।

error: Content is protected !!