मनाली की उझी घाटी के लोग दीपावली पर ना पटाखे फोड़ते है और ना ही बांटाते है मिठाइयां

जिला कुल्लू के उपमंडल मनाली की उझी घाटी में दीपावली के दिन न तो पटाखों की गूंज सुनाई देती है और न ही मिठाई बांटने का कोई रिवाज है। यहां दीपावली को भी माहौल सामान्य दिनों की तरह रहता है।

हालांकि लोग घरों में अब लक्ष्मी की पूजा करने लगे हैं। लेकिन पटाखों से अभी भी दूरी बनाए हुए हैं। यह वही घाटी है जो सतयुग से अपने आराध्यदेव के आदेशों का पालन करती रही है और आज भी जनवरी महीने में लोहड़ी पर्व के दौरान उझी घाटी के लोग देवता के तपस्या में लीन होने के चलते 42 दिन न टीवी देखते हैं न ही खेत खलियानों का रुख करते हैं।

मनाली के सोलंग, पलचान, रुआड, कोठी, कुलंग, मझाच, बरुआ, शनग, गोशाल और मनाली गांव के ग्रामीण आज भी पटाखों से दूरी बनाए हुए हैं। इस बार भी लोग सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए दिवाली के बजाय दियाली उत्सव को मनाएंगे।

दियाली उत्सव दिसंबर महीने में सृष्टि के रचियता मनु महाराज के प्रांगण से शुरू होगा और समस्त घाटी में मनाया जाएगा। मान्यता है कि सर्दियों में घाटी भारी बर्फ़बारी में दब जाती थी तो प्रेत आत्माओं से रक्षा करने को लोग देवताओ की पूजा करते थे और दियाली का उत्सव मनाकर बुरी आत्माओं को घाटी से बाहर भगाते थे।

लोग सदियों से इस परंपरा का निर्वाहन कर रहे हैं। मनाली गांव के ग्रामीणों के अनुसार घाटी के लोग सदियों से दिवाली नहीं मनाते हैं, क्योंकि उझी घाटी की स्थानीय दिवाली पौष महीने में मनाई जाती है, इसे एकदम इको फ्रेंडली रूप में मनाते हैं, जिसमे पटाखे आदि प्रदूषण पैदा करने वाले किसी भी उत्पाद का कोई प्रयोग नहीं होता है।

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