जिन नेताओं को जनता चुनकर भेजती है, वह जनता के लिए आवाज नही उठाते- प्रकाश शर्मा

मंडी/कुल्लू,प्रकाश शर्मा। इस युग में दिन प्रतिदिन हजारों लोग बेरोजगार होते जा रहे है क्यूंकि हमारी सरकारें ही हम लोग को रोजगार के मुहैया करवाने में असमर्थ हो रही है दिन प्रतिदिन नेता लोग अपनी राजनीतिक की रोटी सेंकने लगी हुई है। नेता व सरकारें हर चीज का निजीकरण करने पर तुली है। जबकि नेताओं को हम चुन कर भेजते है पता नहीं उनको क्या हो जाता है, वो लोग जनता के बारे में सोचना ही बंद कर देते है। यह मेरे देश का दुर्भाग्य है कि जिन नेताओं को हम लोग उनके झुठे वादों में आकर उन को जीता कर भजे देते है, और उन नेताओं को हर फायदा मिलना शुरू हो जाता है। जैसे ही उनका का शपथ ग्रहण होता है, उसके तुरंत ही नेता लोग पेंशन के हकदार हो जाते है, चाहे वह एक मिनट के अंदर ही वह सरकार गिर जाए। लेकिन जो लोग अपने जिंदगी के 58 साल जनता की सेवा के लिए देते है, नेताओं ने उनकी पेंशन बंद कर दी गई है।

जिन नेताओं को जनता अपने हकों की लड़ाई के लिए चुनकर भेजती है, वह लोगों जनता की आवाज को बुलंद नहीं कर पाते है और अपना पेट भरने के लिए ही काम करते है। जब भी चुनाव आते है, तो इन नेताओं को वहीं जनता याद आ जाती है और हम लोगों को जातिवाद, धर्म, राजनीति का शिकार जनता को बनाकर अपना उल्लू सीधा कर लेते है। जबकि अपना काम यह नेता लोग निकाल रहे है, अब जनता के जागने का समय आ गया है। जो भी नेता आपसे से वोट मांगने आए। सबसे पहले जनता उससे पूछे की जीतने के बाद वह जनता के लिए क्या क्या काम करगें। कैसे बढ़ती बेरोजगारी पर रोक लगा सकेंगे। जो सरकार हम लोगों को रोजगार मुहैया नहीं करवा सकती है उसको जनता क्या वोट दे देगी, जो नेता लोग व सरकारें जनता के हकों के लिए फैसला नहीं कर सकती है उसको क्या जनता वोट दे देगी, या तो जनता उसी को वोट दे जो नेता जीतने के बाद जनता को नहीं भूल जाए और जनता के लिए काम करे।

यह उस समय की मांग और सोचने की बात है कि हमने किसको वोट दिया है या फिर जनता उन नेताओं को कोसना बंद कर दे। नेताओं का काम होता है जनता के लिए रोजगार देना, दिनप्रतिदिन बढ़ती बेरोजगारी भी हमारे देश के लिए चिंता का विषय है। लेकिन सरकारें इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है, क्योंकि सरकारें हर सरकारी चीज का निजीकरण करने पर तुली हुई है। जिससे बड़े-बड़े उद्योगपतियों को फायदा हो रहा है और जो लोग 15 से 20 हजार की सैलरी के काबिल है उनको 5 हजार की सैलरी से ही गुजारा करना पड़ रहा है। क्योंकि उद्योगपतियों को पता है कि जैसे जैसे दिन प्रतिदिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, बड़े-बड़े उद्योगपतियों को भी इस बढ़ती बेरोजगारी से फायदा हो रहा है इन उद्योगपतियों को बढ़ी आसानी से 5 हजार में युवक व युवतियां काम करने के लिए मिल रहे है।

पढ़े-लिखे ग्रेजुएट युवक व युवतियां को सैलरी जो सरकार ने तय की वह है 15000 से 20000 रुपये के बीच में है। लेकिन नेता व सरकारें मिलकर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है। इसलिए ही नेता लोग व सरकारें हर सरकारी चीज का निजीकरण कर रही है। क्योंकि वही बड़े-बड़े उद्योगपति उनको इलेक्शन में नेता लोगों के लिए पैसा खर्च करते है। फिर वही नेता लोग जीत कर उन लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहे है। इसलिए दिनप्रतिदिन बढे रही है बेरोजगारी।

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