हठधर्मिता की बलि चढ़ेगी बल्ह की जमीन, कौड़ियों के भाव खरीद कर अडानी को सौंपना चाहती है सरकार-वालिया

बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, जोगिन्दर वालिया ने कहा कि पिछले कल शिमला में मंडी हवाई अड्डा विकास की बैठक में एक नया संशोधित 3150 मीटर लम्बा मास्टर प्लान जिसके अनुसार अब हवाई पट्टी का रनवे 1050 मीटर उत्तर की तरफ (सिह्न-चंडयाल) बढ़ा दिया है और अब बल्ह को बर्बाद करने के लिए केंद्र सरकार से वितपोषण हेतु गुहार लगाएगी। जो कदापि पूरा नहीं हो पाएगा (ज़ेबा नी धेला, चड़ना रेला) क्योंकि केंद्र सरकार पहले से ही अपने सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथो में बेच रही है, ज्यादातर विमान व एयरपोर्ट अड्डे पहले ही अदानी को बेच चुकी है और राज्य सरकार मार्च 2022 तक धर्मशाला एयरपोर्ट भी निजी हाथों को देने जा रही है।

संघर्ष समिति को अंदेशा है कि जयराम सरकार कि मिलीभगत से बल्ह की उपजाऊ जमीन में एयरपोर्ट का एकतरफा फैसला लेकर जल्दी से कौड़ियों के भाव जमीन लेकर इन्वेस्टर मीट के बहाने अदानी को सौंपना चाहती है। हम पूछना चाहते है बल्ह की उपजाऊ भूमि में ही हवाई अड्डे का निर्माण क्यों किया जा रहा है, और क्या हवाई अड्डा गैर उपजाऊ जमीन पर नहीं बनाया जा सकता, जबकि आज तक केंद्र सरकार ने हवाई अड्डे गेर उपजाऊ जमीन पर बनाये है।

संघर्ष समिति के सचिव नन्द लाल वर्मा ने हैरानी जताते हुए कहा कि मंडी लोकसभा चुनाव की हार का बदला बल्ह के किसानों से लिया जा रहा है। अब लिडार सुर्वे के माध्यम से बल्ह को पूरी तरह से बर्बाद करने एक तरफा प्रयास चल रहे हैं। जय राम ठाकुर अपने सपने को पूरा करने कि जिद पर अड़े हुए है जिसे कदापि सहन नहीं किया जाएगा। बल्ह में प्रस्तावित हवाई अड्डा क्षेत्र के किसानों के लगभग 2500 स्थानीय परिवार एवं 12000 की आबादी को प्रस्तावित हवाई अड्डे की वजह से भूमिहीन तथा विस्थापित करने पर तुले हुए है और बल्ह क्षेत्र का नामोनिशान मिटाने पर अड़े हुए है। बल्ह कि जनता जो नकदी फसले उगा कर जीवन चला रही है उन्हें बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ेगा पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे। आने वाले दिनों में बल्ह के सभी गावों में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और सरकार के खिलाफ अन्य किसान संघठनों के साथ मिलकर तीखे संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

उन्होंने कहा सरकार से मांग की जाती है कि समय रहते प्रस्तावित हवाई अड्डे को किसी दूसरी जगह बनाया जाए और इस क्षेत्र की उपजाऊ भूमि को हर हाल में बताया जाए और मुख्यमंत्री अगर अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ते हैं तो जो ट्रेलर अभी चुनाव में मंडी की जनता ने दिखाया है, आने वाले 2022 के चुनाव में इससे भी ज्यादा हार का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।

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