फर्जी दस्तावेजों पर बिक गई पोंग विस्थापितों की जमीन; पुलिस ने नही की कोई कार्यवाही

सालों पहले पोंग बांध बनाकर वहां के निवासियों को विस्थापित किया गया। सभी कुछ सही से चलता रहा लेकिन आज 50 साल बाद, जब पोंग बांध विस्थापितों की दूसरी पीढ़ी आ गई है उनको ना तो उचित मुआवजा मिला और ना ही कहीं जमीन दी गई। आज भी पोंग बांध विस्थापित हिमाचल और राजस्थान सरकार के बीच पीस कर अपनी जिंदगियां बर्बाद कर रहे है। उनकी एक पीढ़ी खत्म होने के कगार पर है और दूसरी पीढ़ी अभी सम्भल रही है। राजस्थान सरकार ने पोंग बांध विस्थापितों को अपने यहां जमीन तो दी लेकिन उनकी सुरक्षा के नाम पर आज तक कुछ नही किया। हिमाचल के लोग जब वहां अपनी जमीने लेने जाते है तो उनको स्थानीय भू माफिया परेशान करता है और ऊपर से सरकारी अधिकारी और पुलिस भी उनकी बात नही सुनती।

पोंग बांध विस्थापितों को उस समय दोनों राज्यों की सरकारों द्वारा ही नही ठगा गया बल्कि आज भी पोंग बांध विस्थापित ठगी का शिकार हो रहे है। ताजा मामला पोंग बांध विस्थापितों को राज्यस्थान सरकार दिए मुरब्बे जाली दस्तावेज बना कर बेच देने का है। जानकारी के मुताबिक गोरखी राम, प्रकाश चंद और बलदेव सिंह को राजस्थान सरकार ओर से जैसलमेर की तहसील नाचना में जारी जमीन के मुरब्बों को वहां के स्थानीय निवासी महावीर ने जाली कागज बना कर बेच दिया है।

पीड़ितों के मुताबिक उन्होंने अपनी जमीन राजस्थान के निवासी महावीर को इकरारनामा बना कर खेती और देखभाल करने को दी थी। लेकिन पिछले 9 महीनों के लॉक डाउन वे दौरान यह तीनों अपनी जमीन देखने जैसलमेर नही जा पाए और पीछे से महावीर ने उनकी जमीन को जाली दस्तावेज बना कर बेच दिया।

जब तीनों को इस बात का पता चला तो वह जैसलमेर अपनी जमीन देखने गए तो पाया कि उनकी जमीन पर कोई और कब्जा किए बैठा हैं। जब उन्होंने इस बारे उस आदमी से बात करनी चाहिए तो उस आदमी ने उनको जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया।

अब तीनों बजुर्गों ने इस बारे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई। लेकिन आज तक पुलिस ने इस मामले में कोई कार्यवाही नही की। बजुर्गो की माने तो तो वह अब तक एक एक लाख से ज्यादा का खर्च पुलिस और उनके अधिकारियों से मिलने पर खर्च कर चुके है। लेकिन अभी तक किसी ओर से कोई न्याय मिलता नजर नही आ रहा।

Please Share this news:
error: Content is protected !!