50 सालों में प्रदेश की आर्थिक राजधानी बना सोलन, जानिए कहाँ हुआ कितना विकास

सोलन जिला की स्थापना की 01 सितंबर 1972 को हुई थी। इन पचास वर्षों में जिला ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। सोलन जिला हिमाचल प्रदेश की आर्थिक राजधानी बन कर उभरा है।

प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व सोलन से एकत्रित होता है। वर्ष 2020-21 में करीब 2500 करोड़ रुपये जिला ने सरकार के खाते में जाम हुए हैं। विकास में भी सोलन जिला अग्रणी है। जिला में कोई भी घर ऐसा नहीं है जहां पर बिजली की रोशनी न पहुंची हो। 35 करोड़ यूनिट बिजली जिलेभर में प्रत्येक माह सप्लाई की जा रही है। करीब 200 करोड़ रुपये की आय बिजली बोर्ड को प्रत्येक माह हो रही है।

इसी प्रकार सोलन जिला में 150 मुख्य व संपर्क मार्ग हैं। जिलेभर में मात्र चार गांव अब ऐसे रह गए हैं, जो सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। 211 पंचायतों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा चुका है। तीन हजार किलोमीटर सड़कों का जाल जिला में बिछ चुका है, जिसमें से 2200 किलोमीटर सड़कें पक्की हैं, जबकि 800 किलोमीटर अभी कच्ची हैं। हालांकि अभी जिला का बीबीएन क्षेत्र रेल लाईन से नहीं जुड़ पाया है। इसी प्रकार सोलन जिला के प्रत्येक घर को इस वर्ष पेयजल नल मुहैया करवाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक जिला में 1.01 लाख पेयजल कनैक्शन मुहैया करवाए जा चुके हैं। अब केवल 13 हजार परिवारों को पेयजल नल मुहैया करवाए जाने हैं। जिला भर में करीब 750 पेयजल योजनांओं के माध्यम से लोगों को पेयजल मुहैया करवाया जा रहा है।

बीते 50 वर्षो में सोलन जिला में स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर हुई है। जिला भर में आठ नागरिक अस्पताल हैं, जबकि एक जिला मुख्यालय में क्षेत्रीय अस्पताल है।

जिला के बड़े संस्थान

सोलन जिला जिला ने मशरूम उत्पादन में देश भर में अपनी पहचान बनाई। चंबाघाट स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने देश को मशरूम उत्पादन करना सिखाया है। इसी प्रकार डा. वाईएस परमार विवि नौणी भी देश का एक मात्र औद्योनिकी एवं वानिकी विवि है। भारतीय वन्य प्राणी सर्वेक्षण विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय भी सोलन में ही हैं। सोलन जिला ने शिक्षा हब के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। जिला भर में 12 निजी विवि हैं जहां पर वर्तमान में देश भर में करीब एक लाख से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

इन्हाेंने किया जिला का नाम रोशन

सोलन जिला के नालागढ़ क्षेत्र के रहने वाले अजय ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी में अपनी पहचान बनाई है। वह कंई बार भारतीय टीम की तरफ से खेल चुेक हैं। वर्ष 2014 में ऐशियन गेम में उन्होंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। उन्हें पदमश्री व अर्जुन आवार्ड से भी नवाजा गया है। सोलन के रहने वाले विक्रम जीत कंवर पाल ने बालीवुड में अपनी पहचान बनाई है व कंई फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया है।

ये हैं चुनौतियां

तेजी से विकसित हो रहे सोलन जिला में नई चुनौतियां भी पैदा होने लगी है। सोलन शहर, नालागढ़, बद्दी, परवाणू व बरोटीवाला में पार्किंग मुहैया करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। जिला की पर्यटन नगरी कसौली भी इसी समस्या से जूझ रही है। बढ़ती ग्रामीण व शहरी आबादी के लिए पेयजल मुहैया करवाना भी काफी चुनौतीपूर्ण है। गर्मियों के दिनों में 50 फीसदी आबादी को पर्याप्त मात्रा में पेयजल नहीं मिल पाता है।

सोलन जिला की आबादी

सोलन जिला की कुल आबादी 580320 है, जिसमें 308754 पुरुष व 271566 महिलाएं शामिल हैं। जिला में 211 पंचायतें व पांच उपमंडल हैं।

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