एचपीयू से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे प्रोफेसर सिकंदर कुमार- एसएफआई

आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रोफेसर सिकंदर कुमार से नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।

एसएफआई ने आरोप लगाते हुए कहा की अभी तक जितने तथ्य विश्वविद्यालय वाइस चांसलर की नियुक्ति को लेकर सामने आए हैं उन तमाम चीजों को मध्य नजर रखते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार को नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। एसएफआई ने आरोप लगाया की उप कुलपति यूजीसी के द्वारा जारी की गई दिशानिर्देशों के किसी भी मानक पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। यूजीसी के अनुसार किसी भी व्यक्ति को विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर तभी नियुक्त किया जाता है जब उसके पास बतौर प्रोफेसर 10 साल का शैक्षणिक अनुभव लेकिन प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार यह पाया गया कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर 2009 के अंदर प्रोफेसर पदोन्नत किए जाते हैं और 2018 के अंदर उन्हें विश्वविद्यालय का उपकुलपति नियुक्त कर दिया जाता है। जिससे साफ झलकता है कि उप कुलपति 10 साल का कार्यकाल बतौर प्रोफेसर पूरा नहीं कर पा रहें है जो सीधे तौर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों का उल्लंघन है।

इसके साथ साथ एक और महत्वपूर्ण चीज जो सामने निकल कर आई है कि जब सिकंदर कुमार विश्वविद्यालय के अंदर प्रोफेसर थे इसके साथ साथ ही वह भारतीय जनता पार्टी के दलित मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर रहे थे। तमाम लोग जानते हैं कि विश्वविद्यालय के कोई भी प्राध्यापक अपने कार्यकाल के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं ले सकते हैं। लेकिन प्रोफेसर सिकंदर कुमार बीजेपी दलित मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर रहे थे और अर्थशास्त्र विभाग में बतौर प्रोफेसर पढ़ा रहे थे। इस से साफ झलकता है कि विश्वविद्यालय के अंदर प्रोफ़ेसर सिकंदर कुमार की नियुक्ति साफ तौर पर राजनीतिक मंशा से की गई उनका विशेष राजनीतिक विचारधारा के प्रति झुकाव को देखते हुए क्योंकि यूजीसी के मानकों पर तो वह खरा नहीं उतर पा रहे थे।

इन तमाम चीजों को आधार बनाते हुए एसएफआई ने यह आरोप लगाया कि सिकंदर कुमार को नैतिकता के आधार पर अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके साथ साथ एसएफआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगे आने वाले समय के अंदर छात्र आंदोलन के तौर पर इस मुद्दे को प्रखर तौर पर उठाया जाएगा और विश्वविद्यालय के अंदर जो प्रदेश सरकार की भगवाकरण की राजनीति का पर्दाफाश किया जाएगा।

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