Salary Ban: गलती करने वाले अधिकारियों के वेतन पर लगाई जा सकती है रोक- शिमला हाई कोर्ट

अगर न्यायालय के फैसले की अनुपालना नहीं की गई तो अदालत को विभाग की संपत्ति कुर्क करने और गलती करने वाले अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने पर बाध्य होना पड़ेगा। प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संदीप शर्मा के न्यायालय ने एक एग्जिक्यूशन पिटीशन की सुनवाई के दौरान प्रदेश के अभियोजन विभाग को ये आदेश दिए हैं।

मामले के तथ्यों के अनुसार मंडी निवासी बीआर शर्मा अभियोजन विभाग में बतौर जिला न्यायवादी के रूप में हमीरपुर में कार्यरत थे। उन्हें विभाग ने 1982 में सेवा से जबरन रिटायर कर दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट में जबरन रिटायरमेंट के विभागीय आदेश को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने पर उनके उत्तराधिकारियों को इस मामले का पक्षकार बनाया गया था। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बनने पर इस मामले को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 1991 में ट्रिब्यूनल में भेज दिया था। ट्रिब्यूनल ने याचिका को स्वीकारते हुए जबरन रिटायरमेंट के आदेश को निरस्त कर दिया था।

इसके अलावा याचिकाकर्ता को सेवानिवृत्ति के समय पर मिलने वाले सभी सेवा संबंधी लाभों को उनके उत्तराधिकारियों को देने के आदेश दिए थे। विभाग ने गलत तरीके से फैसले को लागू करते हुए इन सेवा संबंधी लाभों को याचिकाकर्ता की मृत्यु तक जारी किया था। याचिकाकर्ता के उत्तराधिकारियों ने विभाग की ओर से फैसले को आंशिक रूप में लागू करने के फैसले को अनुचित मानते हुए ट्रिब्यूनल ने एग्जिक्यूशन पिटीशन दायर दी थी। ट्रिब्यूनल ने इस पिटीशन को उचित मानते हुए इसे उत्तराधिकारियों के पक्ष में साल 1997 में निस्तारित किया था। इसके बाद विभाग ने याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद लाभ देने के ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस याचिका को 2005 में खारिज कर दिया था। ऐसे में 2005 में फिर से एग्जिक्यूशन पिटीशन दायर की थी। इधर, हाईकोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 14 दिसंबर को निर्धारित की है। स्पष्ट किया है कि अगर फैसले को अगली सुनवाई तक लागू नहीं किया गया तो न्यायालय को विभागीय संपत्ति कुर्क करने और गलती करने वाले अधिकारियों के वेतन रोकने पर बाध्य होना पड़ेगा।

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