गणतंत्र अमर रहे – अमर स्नेह

मनूवाद के कठपुले,
प्रजातांत्र के हत्यारे,
कितने बौने लगते हैं,
इस विराट भारत के सामने।

अब समता स्वतंत्रता भाईचारे का भारत,
इंकलाब का फरमान बना है,
अब रौंदोंगे इंकलाब तो सैलाब बनेगा,
रोकोगे सैलाब तो तूफान उठेगा।

छेड़ोगे तूफ़ान तो ज़लज़ले में,
हमेशा के लिए दफन हो जाएगें,
तुम्हारे षड्यंत्र तुम्हारे इरादे,
हमेशा हमेशा के लिए।

जय संविधान! जय मजदूर! जय किसान! जय जवान!

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