किताब के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानी को किया याद, 1948 में हुए सुकेत विद्रोह में निभाई थी अहम भूमिका

करसोग। 1948 में हुए सुकेत विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाले और उस समय करसोग तहसील प्रजामंडल के अध्यक्ष रहे दिलाराम महाजन को आज सुकेत रियासत के विद्रोह नामक किताब के माध्यम से याद किया गया। समाज सेवी बंसीलाल कौंडल ने उक्त किताब उनके सुपुत्र और करसोग क्षेत्र के प्रसिद्ध अध्यापक तुलसीराम गुप्ता को भेंट की गई।

ज्ञात रहे कि सुकेत राजा जब भारत मे विलय के लिए इनकार कर रहा था तो करसोग, पांगणा, तातापानी, निहरी, नाज आदि की जनता ने राजा के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया था। इस विद्रोह में 4 हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था। उस समय तातापानी, फिरनु, तहसील करसोग, निहारी की चौकियों पर विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया था। पूर्व में राजधानी रही पांगणा के किलों को गिरा दिया गया था।

समाजसेवी बंसीलाल कौंडल ने कहा कि हमे अपने क्षेत्र के क्रांतिकारी इतिहास पर गर्व है। यहां के लोग न अंग्रेजों के आगे झुके और न राजा के आगे। बेगार और शोषण के खिलाफ लड़ाई आज भी प्रेरक है। उन्होंने किताब के लेखक गगनदीप सिंह का भी धन्यवाद किया जिन्होंने तीन साल की मेहनत से किताब तयार की। उन्होंने कहा हर सुकेतवासी ये किताब पढ़नी चाहिए।

तुलसीराम गुप्ता ने किताब देख कर काफी खुसी प्रकट की। उनके पिताजी द्वारा उर्दू में लिखी गई अपनी आत्मकथा को उन्होंने हिंदी अनुवाद कर लेखक को दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी कुर्बानी युवाओं के लिए प्रेणना स्रोत हैं।

इस किताब में करसोग क्षेत्र के लगभग 100 के करीब लोगों का जिक्र है और 32 विद्रोहियों के फोटो भी है।

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