चुनाव आयोग रखेगा नजर; चुनावी क्षेत्रों के सटे जिलों में बिना अनुमति नही होगी राजनीतिक गतिविधियां

हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत अब चुनावी क्षेत्रों से सटे जिलों में भी अगर किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को चुनावी कार्यक्रम आयोजित करना है तो उन्हें इसके लिए भी संबंधित जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

आयोग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं और सभी राजनीतिक दलों व जिला निर्वाचन अधिकारियों को आदेशों का पूरी तरह से पालन करने के लिए कह दिया है।

चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव वाले क्षेत्रों से सटे अन्य क्षेत्रों में राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जिनसे चुनावी प्रक्रिया में असर पड़ रहा है। चूंकि अभी तक चुनाव वाले संबंधित जिले तक ही आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू थी इसलिए अन्य जिले में हो रहे कार्यक्रम को रोका नहीं जा सकता था। लेकिन इस विषय को आयोग ने गंभीरता से लेते हुए अब स्पष्ट कर दिया है कि सटे हुए जिले में भी किसी भी तरह के चुनावी कार्यक्रम के आयोजन पर आदर्श आचार संहिता, कोविड निर्देश और खर्च निगरानी संबंधी जरूरी व्यवस्था लागू रहेगी।

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की 28 शिकायतों का निपटारा
मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश सी पालरासु ने बताया कि मंडी लोकसभा क्षेत्र, फतेहपुर, अर्की व जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के दृष्टिगत संबंधित जिलों में लागू आदर्श आचार संहिता की अनुपालना सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उपनिर्वाचन प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के समयबद्ध व त्वरित निपटारे के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों और संबंधित विभागों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्वाचन विभाग के पास अभी तक 47 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 28 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है।

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