खतरे के निशान पर पहुंचा पंडोह डैम का पानी, लोगों से किनारों से दूर रहने की अपील

Himachal News: भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की ब्यास सतलुज लिक (बीएसएल) परियोजना के कैंचमेंट एरिया में पहाड़ों पर गिरी बर्फ तेजी से पिघलना शुरू हो गई है। इससे ब्यास नदी में जलस्तर अचानक बढ़ गया है। पंडोह बांध में जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। किसी भी समय बांध के गेट खोले जा सकते हैं। जिला प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों को ब्यास किनारे नहीं जाने के निर्देश दिए हैं।

बीएसएल परियोजना का कैचमेंट एरिया मंडी जिला के साथ-साथ कुल्लू जिला तक है। सर्दी के सीजन में पहाड़ों पर जमी बर्फ अब पारा चढ़ने के साथ पिघल रही है। इससे ब्यास नदी में पानी की आमद बढ़ने से परियोजना के पंडोह स्थित मुख्य बांध में भी जलस्तर 2,937 फीट तक पहुंच गया है। 2,939 फीट जलस्तर पहुंचने पर पानी छोड़ने के लिए गेट खोलने पड़ेंगे।

इधर, पंडोह से सुंदरनगर जलाशय के लिए नहर की क्षमता के अनुसार 8,500 क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। 30 जून की रात से परियोजना प्रबंधन सुंदरनगर स्थित जलाशय से भी गाद की निकासी शुरू करने जा रहा है। इसके लिए जलाशय में दो ड्रेजर तैयार है। सुकेती खड्ड में जलाशय से गाद उगलने से सुंदरनगर से लेकर मंडी तक के दायरे में सुकेती खड्ड की निर्मल धारा भी पूरी तरह दूषित हो जाएगी। सुकेती खड्ड में गाद युक्त पानी की आमद बढ़ने से डडौर से लेकर चक्कर तक के दायरे में लोगों को खड्ड के आर पार खेतों में आवागमन मुश्किल हो जाएगा।

ब्यास नदी में पानी की आमद अधिक होने से पंडोह बांध में जलस्तर बढ़ गया है। पंडोह बांध में पानी खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। किसी भी समय बांध के गेट खोले जा सकते हैं। लिहाजा लोग ब्यास के तटीय क्षेत्रों में सावधानी बरते। नदी किनारे जाने से लोग परहेज करें।

-अरिदम चौधरी, उपायुक्त मंडी।

नदी किनारे न जाएं स्थानीय लोग : त्रिपाठी

संवाद सहयोगी, कुल्लू : पार्वती जलविद्युत परियोजना चरण-दो के पावर हाउस की दो यूनिट जीवा नाला व हुरला नाला में उपलब्ध पानी के हिसाब से 70 से 130 मेगावाट पर चल रही है। यूनिट के अचानक लोड कम होने जाने या ट्रिप हो जाने की वजह से शीलागढ़ आउटफाल स्ट्रक्चर से पानी का रिसाव होता है, जिसके कारण उस दौरान पानी के चपेट में आने से जान माल की क्षति हो सकती है। एनएचपीसी चरण दो के महाप्रबंधक प्रभारी एलके त्रिपाठी ने बताया कि इसके कारण गड़सा वैली के हुरला नाला तथा सैंज वैली के जीवा नाले का पानी कभी भी घट-बढ़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील कि है कि नाले के किनारे न जाएं। पशुओं को भी नाले के किनारे न जाने दें।

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