Himachal: सरकार ने एसएमसी अध्यापकों के लिए पॉलिसी बनाई, तो सुप्रीम कोर्ट में दायर होगी अवमानना याचिका

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में ऐलान किया था कि जल्द एसएमसी अध्यापकों के लिए पॉलिसी बनाई जायेगी तथा उनको नियमित किया जाएगा। लेकिन हिमाचल प्रदेश की कैबिनेट भूल गई कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी एक आदेश जारी कर रखा है। जिसके मुताबिक नियमित अध्यापकों की भर्ती होने पर एसएमसी अध्यापकों को हटाना सुनिश्चित करेगी।

अब इस मामले में बेरोजगार संघ सरकार के खिलाफ उतर गया है। हिमाचल प्रदेश बेरोजगार अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष निर्मल सिंह धीमान, महासचिव लाजेश धीमान तथा मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद ने अपने सांझा बयान में कहा कि प्रदेश सरकार ने यदि 2555 एसएमसी शिक्षकों के लिए पालिसी बनाई तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना होगी तथा बेरोजगार संघ ऐसा होने पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका याजिका दाखिल करेगा।

उन्होंने कहा कि 24-11-2020 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एसएमसी शिक्षकों की भर्तीयां 17-7-2012 की नोटिफिकेशन के अनुसार तब तक सही हैं, जब तक इन शिक्षकों के स्थान पर नियमित शिक्षक नियुक्त नही किए जाते। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष जनता को यह कह कर गुमराह कर रहा है कि एसएमसी शिक्षक केवल दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि सच यह है कि 2555 एसएमसी शिक्षक प्रदेश के हर जिला में तैनात हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हम सभी जानते हैं कि 17-7-2012 की नोटिफिकेशन के अनुसार सरकार और एसएमसी कमेटियों को स्कूलों में हर शैक्षणिक सत्र के पश्चात एमएमसी शिक्षकों के स्थान पर नए शिक्षक तैनात करने थे क्योंकि यह एक अस्थायी व्यवस्था थी। इस नियम में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 17-7-2012 की नोटिफिकेशन का हवाला भी दे रखा है। उन्होंने बताया कि 2555 एसएमसी शिक्षकों की भर्ती न तो कमिशन से हुई है और न बैचवाईज हुई है। इसलिए यह भर्ती बैकडोर है। ऐसी भर्तीयों के कारण 1999 बैच का पात्र उमीदवार अभी भी बेरोजगार है जबकि 2012 बैच का अपात्र उमीदवार बिना कमिशन पास किए नौकरी ले गया है।

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