लेबर ऑफिसर मंडी पर मजदूरों के लाभ रोकने का आरोप, RTI से खुलासा 73355 क्लेम पेंडिंग

मनरेगा एवं निर्माण मजदूर फेडरेशन जिला कमेटी मंडी ने लेबर ऑफिसर मंडी पर मजदूरों के लाभ रोकने का आरोप लगाया है. मजदूर फेडरेशन के राज्य महासचिव व सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि आरटीआई से हासिल की गई जानकारी के अनुसार मंडी जिला में वर्तमान में मजदूरों के 73355 क्लेम पेंडिंग पड़े हैं, जो हिमाचल प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री के गृह जिले में श्रम विभाग व श्रमिक कल्याण बोर्ड की लचर कार्यप्रणाली का जीता जागता उदाहरण है.

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नए श्रम अधिकारी ने फरवरी माह में कार्यभार संभालने के साथ मात्र 42 क्लेम ही शिमला बोर्ड कार्यालय को स्वीकृति के लिए भेजे हैं, जबकि उनके कार्यकाल में पिछले सात महीनों में ही 21 हजार से ज्यादा क्लेम मजदूरों ने कार्यालय में जमा किये हैं, लेकिन श्रम अधिकारी और बोर्ड कर्मचारिओं की लापरवाही के कारण हजारों मजदूरों के लाभ रुक गए हैं.

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि 21729 मजदूरों के पंजीकरण कॉर्ड जारी होने के लिए पेंडिंग हैं. इसके अलावा 13113 क्लेम शिक्षण छात्रवृत्ति 10606 इंडक्शन हीटर 10728 सोलर लैम्प 5491 साइकलें 10 831 कम्बलों, टिफिन, डिनर सेट व वाटर फिल्टरों के क्लेम कार्यालय में पेंडिंग हैं.

511 क्लेम विवाह शादियों के 203 प्रसूति 100 चिकित्सा लाभ के 18 मृत्यु और 25 क्लेम पेंशन के पेंडिंग पड़े हैं जिन्हें जानबूझकर सेंक्शन हेतु नहीं भेजा जा रहा है, लेकिन न तो राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड उनसे इस बारे पूछ रहा है और न सरकार व मुख्यमंत्री इसकी जानकारी ले रहे हैं.

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि 30 जनवरी को मंडी लेबर ऑफिसर व अन्य सभी बोर्ड के कर्मचारी यहां से राजनितिक आधार पर ट्रांसफर कर दिये गये थे. जिसके लिए जल शक्ति मंत्री ने मुख्य भूमिका निभाई थी, लेकिन अब जो नया श्रम अधिकारी व बोर्ड का स्टाफ यहां उन्होंने लगाया है वो उनके कहे अनुसार काम कर रहा है और किसी भी क्लेम को सेंक्शन हेतु शिमला नहीं भेज रहे हैं.

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आरटीआई से पता चला है कि इस वर्ष के जनवरी माह में जब पुराना स्टाफ यहां कार्यरत था तब एक महीने में कुल 788 क्लेम शिमला प्रेषित हुए थे, लेकिन नए लेबर ऑफिसर व स्टाफ ने फरवरी से अगस्त माह तक बीते सात महीनों में मात्र 42 ही क्लेम शिमला बोर्ड कार्यालय को भेजे हैं. जिससे साफ हो गया है कि वर्तमान स्टाफ काम न करने और मजदूरों के लाभ न देने के लिए यहां लगाया गया है.

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उनके संगठन ने इसकी शिकायत दो बार बोर्ड के सचिव को भेजी है और एक बार मंडी लेबर ऑफिस के ऊपर भी प्रदर्शन किया था, लेकिन इस ऑफिस की कर्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हो रहा है. इसलिए यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल वीरवार 26 अगस्त को बोर्ड के नवनियुक्त चेयरमैन से मिलने शिमला जा रहा है और उसके बाद सीटू से जुड़ी हुई मजदूर यूनियन सितंबर के प्रथम सप्ताह में लेबर ऑफिस पर निरंतर धरना प्रदर्शन करने जा रही है.

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि बहुत से मजदूरों को गत वर्ष कोरोना लॉकडाउन अवधि के लिए निर्धारित 6-6 हजार रुपये राशि अभी तक नहीं मिली है. दो साल पहले पंजीकृत मजदूरों को उनके कार्ड जारी नहीं हो रहे हैं. महिला महदूरों को मिलने वाली वॉशिंग मशीन व साइकल और सभी मजदूरों को मिलने वाली अन्य सामग्री भी इस सरकार ने बंद कर दी है, जिसकी बहाली की मांग भी यूनियन कर रही है.

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