जयराम ठाकुर व सुरेश कश्यप को मिला अभ्यदान, डैमेज कंट्रोल पर फोकस करने की हिदायत

शिमला: उपचुनाव में भाजपा को मिली हार पर शिमला में 3 दिन तक हुए मंथन से फिलहाल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप को अभ्यदान मिल गया है। पार्टी ने सत्ता-संगठन के दोनों नेताओं पर भरोसा जताते हुए डैमेज कंट्रोल पर फोकस करने की हिदायत दी है। ऐसे में यदि आने वाले समय में सत्ता और संगठन पार्टी आलाकमान की उम्मीदों के अनुरूप सही दिशा में आगे बढ़ता है तो बड़े स्तर पर किसी तरह का फेरबदल नहीं होगा। फिर भी कुछ मंत्रियों व पदाधिकारियों की छुट्टी हो सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं विशेषकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने एकला चलो की थयूरी पर नहीं चलते की सलाह दी है। यानि आने वाले समय में कार्यकर्ताओं को सुनने वाले नेताओं का दौर चलेगा। इसके अलावा पार्टी नड्डा के 5 क फार्मूला (कार्यकर्ता, कार्यकारिणी, कार्यक्रम, कोष व कार्यालय) पर अमल करेगी।

सत्ता-संगठन को साथ में लेकर चलने की चुनौती

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष आने वाले समय में सत्ता-संगठन को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। उपचुनाव के दौरान देखा गया था कि पार्टी में टिकट आवंटन से नाराज नेताओं ने किनारा कर लिया था जो हार का प्रमुख कारण बना। इसी तरह टिकट से वंचित रहने वाले व काम न होने से निराश नेताओं ने भितरघात भी किया, जिसका लाभ सीधे तौर पर विपक्ष को मिला। ऐसे में विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री को टिकट से वंचित रहे नेताओं को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी।

मंत्री-अफसरों पर नकेल कसने की हिदायत

भाजपा के मंथन में मुख्यमंत्री को मंत्री व अफसरों पर नकेल कसने की हिदायत दी गई है। पार्टी के कुछ नेताओं ने इसको लेकर तल्ख टिप्पणी भी की। यानि केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने और कार्यकर्ताओं के काम करने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

संगठन को शाबाशी पर तालमेल बनाने की आवश्यकता

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा व प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना सहित अन्य नेताओं ने प्रदेश में संगठन के नेताओं की पीठ थपथपाई है लेकिन बेहतर तालमेल बनाए जाने पर बल दिया गया है। उपचुनाव के दौरान यह देखा गया कि संगठन के नेता ही आपस में भिड़ते रहे, जिसका लाभ कांग्रेस को मिला।

दिल्ली में खुलेगा मंथन का पिटारा

भले ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने प्रदेश में सत्ता एवं संगठन की पीठ थपथपाई है लेकिन शिमला मंथन में हुई चर्चा का पिटारा अब दिल्ली में खुलेगा। ऐसे में जब पार्टी आलाकमान इन विषयों पर विस्तार से चर्चा करेगा तो इसके आधार पर सत्ता-संगठन में फेरबदल किए जा सकते हैं।

सत्ती-बिंदल को नगर निगम की जिम्मेदारी

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में शिमला नगर निगम के चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से लेगी, जिसके लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल व पूर्व अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को शिमला नगर निगम में वार्डों के परिसीमन सहित अन्य कार्यों को देखने का जिम्मा सौंपा गया है।

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