शिलान्यास पट्टिका में नाम नहीं है तो कोई बात नहीं, जनता सब देख रही है- अनिल शर्मा

मंडी : मैं व्यवधान पैदा नहीं करना चाहता। मैं निर्वाचित विधायक हूं। शिलान्यास पट्टिका में नाम नहीं तो कोई बात नहीं। कुछ नहीं बोलूंगा, जनता सब देख रही है। यह क्षेत्र पंडित सुखराम की कर्मभूमि है। राजनीति में उतार-चढ़ाव संभव है। सीएम साहब मेरी बात का जल्दी बुरा मान लेते हैं लेकिन मैं विकास की बात करता हूं। यह बात विधायक अनिल शर्मा ने मंडी में कोटली जनसभा में कही। कोटली में 80 करोड़ के शुभारंभ और शिलान्यास पट्टिकाओं में विधायक अनिल शर्मा का नाम गायब रहा, जिस पर विधायक ने रोष व्यक्त किया है। इस बीच अनिल शर्मा के समर्थकों ने नारेबाजी की। मंच छोड़ कर अनिल शर्मा अपने समर्थकों को समझाने चले गए। अनिल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री मेरे लिए जो कहना है कह लें, मुझे फर्क नहीं पड़ता। 

कोटली बस अड्डे को लेकर कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि जब बस अड्डा बना तो मंत्री ने ही बोला था कि नाले में बस अड्डा बना दिया। अब यदि बस अड्डा नहीं होता तो जनसभा भी नहीं होती। अगर कुछ ज्यादा बोल दिया तो सीएम माफ करें। एक विधायक होने के नाते बोले तब भी बुरे, न बोलें तब भी बुरे। महेंद्र सिंह और मेरा रिश्ता ही कुछ ऐसा है। कभी मैं गाड़ी चलाता था तो महेंद्र सिंह साथ में बैठते थे। अनिल ने मंच से रोष जताते हुए कहा कि मैं चुप रहूंगा। सीएम जयराम ने कहा कि सारी इच्छाएं पूरी नहीं होती। 

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी को जन्माष्टमी की बधाई देते हुए कहा कि आज का कार्यक्रम जन्माष्टमी के दिन हो रहा है। यह मेरा पहला सरकारी दौरा है। आप सभी ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। मैं पहले भी कोटली आना चाहता था, लेकिन कोविड के कारण आ नहीं पाया। राजनीतिक दृष्टि से कई बातें सुनने और देखने को मिलीं, कई चीजें हो जाती हैं। कहना नहीं चाहता। मंडी के बेटे को मौका मिला है कि हर बार मान और सम्मान की लड़ाई भी लड़ी जाती है। सीएम ने कहा कि आगे बढ़ना चाहिए। कुछ को हमारे काम करने का तरीका अच्छा नहीं लगता। एकजुट होकर चलना चाहिए। कई इच्छाएं पूरी नहीं हो पातीं। एक ऐसा दौर आया है, इसे समझो और मिलकर चलो। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कोविड टीकाकरण में पहले नंबर पर आने के लिए प्रधानमंत्री जल्द हिमाचल की जनता को संबोधित करेंगे। 

अनिल शर्मा को कहना चाहता हूं कि आप हमें दोष नहीं दे सकते। इसका भगवान भी साक्षी है। हमने बोला साथ चलो। मंडी के सम्मान के लिए साथ करो। कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं तो किसी को दोष नहीं दे सकते। कई बार भाग्य में यही लिखा होता है। शीर्ष नेतृत्व ने कहा कि नामांकन जब भरना है तो मैं पैदल चलकर आया। महेंद्र सिंह और ये साथ थे। शायद गुरू-चेले थे। अनिल बोले कि महेंद्र को गाड़ी सिखाई। ठीक है स्टीयरिंग कभी इधर कभी उधर हो जाता है। जहां रहते हैं खूब काम करते हैं। भाजपा में भी कर रहे हैं। कुछ मनमुटाव होता है, सब बातों को भूलकर साथ चलना चाहिए। लेकिन अब हम साथ-साथ हैं।

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