मेयर सत्या कौंडल के वार्ड में 32 लाख से बनी सड़क पर नही चढ़ती गाड़ी, ठेकेदार के खिलाफ होगी कार्यवाही

शिमला : सड़कें ना सिर्फ आम आदमी की जरूरत है बल्कि वाहनों की आवाजाही एक सुविधा संपन्न माध्यम भी है। पर क्या हो कोई सड़क बनकर तैयार हो पर उस पर वाहन चढ़े ही नहीं। जी, हां हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक ऐसी सड़क है, जिसका 32 लाख रूपए में निर्माण किया परंतु इस सड़क पर वाहन चढ़ते ही नहीं है। सबसे खास बात यह है कि यह सड़क नगर निगम शिमला के मेयर सत्या कौंडल के वार्ड में ही तैयार की गई है। नगर निगम शिमला ने संजौली चौक से अपर नॉर्थ ओक के लिए एंबुलेंस रोड तो तैयार करवा दिया लेकिन इसमें चढ़ाई इतनी तीखी है कि एंबुलेंस तो क्या बाकी गाड़ियां भी नहीं चढ़ पाईं। स्थानीय लोगों ने जब नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए तो निगम ने तुरंत ही इस सड़क को तोड़कर इसकी री ग्रेडिंग शुरू कर दी। अब 15 लाख रुपये और खर्च होंगे। लोगों ने कहा कि नगर निगम पैसों की बर्बादी कर रहा है। 

एक सड़क के लिए दो-दो बार टेंडर करने पड़ रहे हैं। सड़क 32 लाख में बननी थी, उस पर अब 50 लाख रुपये से ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है। नगर निगम रिटेनिंग वॉल देकर सड़क की री ग्रेडिंग कर रहा है ताकि गाड़ियां चढ़ सके। निगम का तर्क है कि पहले साथ लगती जमीन पर काम की अनुमति नहीं मिली, लेकिन सवाल उठता है कि जब अनुमति नहीं मिली तो ऐसी सड़क बनाना क्या जरूरी था जिस पर गाड़ियां नहीं चढ़ पाती। 

मेयर सत्या कौंडल ने कहा कि उन्होंने शहरी विकास विभाग से 32 लाख लेकर यह सड़क बनवाई थी। सड़क ऐसी बनी कि गाड़ियां नहीं चढ़ीं। अफसरों को देखना चाहिए था कि सड़क कैसी बन रही है। स्थानीय लोगों ने उनसे बात की कि इस सड़क की हालत सुधारी जाए। अब 15 लाख से इसकी री ग्रेडिंग करवा रहे हैं। संजौली वार्ड के चलौंठी चौक से लोअर चलौंठी सड़क पर नगर निगम ने ठेकेदार को डंगे लगाने का जिम्मा दिया था। इसे दो फीट चौड़े डंगे लगाने को कहा था, लेकिन मौके पर ठेकेदार ने चार फीट चौड़े डंगे लगा दिए। इस पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया। अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने ऐसा करने को नहीं कहा है। ऐसे में अब ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

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