100 स्वच्छ शहरों की सूची में 65 नंबर से 102 पर फिसला शिमला, रिज और माल रोड़ तक सिमटी सफाई व्यवस्था

शिमला। शिमला शहर को झटका। देश के 100 साफ शहरों की सूची से शिमला बाहर हो गया है। पिछली बार 65 नंबर पर शिमला रहा था, इस बार ये लुढ़ककर 102 नंबर पर पहुंच गया है।

शहर के शौचालयों की सफाई से लेकर शहर की सड़कों तक तक की सफाई में पिछड़ा है। सर्वेक्षण टीम ने राजधानी के व्यस्ततम स्थानों पर किया था। इससे शिमला शहर से जुड़े हजारों लोगों को केंद्रीय स्तर पर हुई शहरों की रैंकिंग ने बड़ा झटका दिया है।

स्वच्छता के क्षेत्र में केंद्रीय शहरी एवं आवास विभाग ने देश के सभी शहरों की रैंकिंग की है। शिमला पहले 100 शहरों में स्थान नहीं बना पाया है, हालांकि शिमला का स्थान पहले 65वें नंबर पर था. ये अब गिर कर देश के सौ साफ शहरों की सूची से बाहर हो गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर को साफ रखने के लिए किया जा रहा का काम कितना जमीनी स्तर पर हो रहा है। भले ही निगम प्रशासन से लेकर शहरी विकास विभाग के आला अधिकारी और पदाधिकारी दावा करे कि शहर को साफ करने के लिए आधुनिक मशीनों से लेकर कर्मचारियों की फौज खड़ी कर दी है । इसका रिजल्ट अब शहर के सामने आ गया है । केंद्र से आई टीम ने शहर के व्यस्ततम स्थानों का दौरा किया था।

इसमें शहर के बस अड्डे, रेलवे स्टेशन से लेकर बाजारों में सफाई का जायजा लिया। इसमें शौचालयों की ही नहीं बल्कि गली मुहल्लों में हो रही सफाई पर सवाल उठाए गए हैं। शिमला में पिछली बार रैंकिंग से पहले नगर निगम की ओर से खुद एक मुहिम पूरे शहर के लिए चलाई गई थी। पूरे शहर को साफ करने के लिए लोगों को जागरुक भी किया गया था। इस बार लोगों को जागरूक करने के लिए मुहिम पर चली थी। निगम को अपनी तरफ से कार्य करना था, उस पर कोई ज्यादा कार्य नहीं हो ना हो सका। इसका असर शहर की रैकिंग पर साफ दिखाई दे रहा है।

शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम योजनाबद्ध तरीके से कोई काम नहीं कर पा रहा है। भले ही इस बार केंद्र में स्मार्ट सिटी के लिए अरबों रुपए दिया है, लेकिन यह काम भी प्लानिंग से नहीं हो रहा है । स्मार्ट सिटी के काम से तो शिमला ज्यादा सुंदर दिखना चाहिए था। इसी से शिमला की प्राकृतिक सुंदरता पर दाग लगाने का काम किया जा रहा है। सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई है।

क्या कहते हैं लोग

सेवानिवृत्त कर्मचारी सुभाष वर्मा ने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था माल रोड और रिज मैदान तक ही सिमट कर रह गई है । लोगों के घरों और गली मोहल्लों में सफाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। स्थानीय निवासी जीवन ठाकुर ने कहा कि कूड़ा संयंत्र जिस पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे । उसका इस्तेमाल भी निगम ठीक से नहीं कर पा रहा है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी अनिल जमवाल ने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था एक समय दोपहर दो बजे तक होती थी। अब सुबह कब सफाई के नाम पर औपचारिकता पूरी कर कर्मचारी वापस लौट जाते हैं यह पता नहीं चलता है।

स्थानीय निवासी नारायण ठाकुर ने कहा कि शहर में बाजारों तक ही सफाई नहीं होनी बल्कि लोगों के गली मुहल्लो में सफाई होनी चाहिए। इसके बाद ही शहर को साफ किया जा सकेगा।

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