निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई 50 फीसदी फीस वृद्धि वापिस नही ली गई तो होगा आंदोलन- अभिभावक मंच


RIGHT NEWS DESK


निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने को लेकर एक बार फिर से विरोध शुरू हो गया है। छात्र-अभिभावक मंच का कहना है कि शहर के निजी स्कूलों ने 50 फीसद तक फीस बढ़ाई है। प्रेस को जारी बयान में मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि शिक्षा निदेशक को फीस बढ़ोतरी के सारे तथ्य सौंपे जा चुके हैं, बावजूद इसके वह इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

उन्होंने निजी स्कूलों द्वारा वर्ष 2020 व 2021 में अभिभावकों का जनरल हाउस किए बगैर की गई 15 से 50 फीसद फीस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है। मंच ने कोरोना काल के इन दो वर्षो में की गई फीस वृद्धि को गैर कानूनी करार दिया है।

उन्होंने इसे समाहित करने की मांग की है। मंच ने इस संदर्भ में तुरंत अधिसूचना जारी करने की मांग की है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सदस्य भुवनेश्वर सिंह, कमलेश वर्मा, रमेश शर्मा, राजेश पराशर, अंजना मेहता, राजीव सूद, विक्रम शर्मा, हेमंत शर्मा, मनीष मेहता, विकास सूद, अमित राठौर, विवेक कश्यप, फालमा चौहान, सोनिया सबरबाल, कपिल नेगी, रजनीश वर्मा, ऋतुराज, यशपाल, पुष्पा वर्मा, संदीप शर्मा, यादविद्र कुमार, कपिल अग्रवाल, नीरज ठाकुर, रेखा शर्मा, शोभना सूद, निशा ठाकुर व दलजीत सिंह ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर फीस बढ़ोतरी को वापस न लिया तो छात्र-अभिभावक मंच आंदोलन तेज करेगा।

उन्होंने शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह सभी निजी स्कूलों में पांच दिसंबर 2019 की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना को लागू करवाएं। दो वर्ष में शिमला शहर में निजी स्कूलों ने 12 से 20 हजार रुपये तक की फीस बढ़ोतरी की है। इन स्कूलों ने बड़ी चालाकी से अब ट्यूशन फीस को भी कई गुणा बढ़ा दिया है व कुल फीस का मुख्य हिस्सा ही ट्यूशन फीस में बदल दिया है। उन्होंने सरकार से निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीसों को संचालित करने के लिए कानून बनाने व रेगुलेटरी कमीशन स्थापित करने की मांग की है।


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