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हिमाचल प्रदेश सरकार का सामान्य वर्ग आयोग बनाने का फैसला गलत, फैसला वापिस ले सरकार- राज महें

आज जिला ऊना से एक जारी ब्यान में राज महें (राज्य महासचिव) राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान एंव राष्ट्रीय दलित न्याय आन्दोलन ने कहा कि धर्मशाला में स्वर्ण आयोग की मांग को लेकर देव भूमि हिमाचल के मुख्यमन्त्र ने जो फैसला लिया है, वो सरासर गलत है। जिसका दलित समाज कड़े तौर पर अपना विरोध प्रकट करता है। माननीय मुख्यमंत्री के ध्यान में ये बात आनी चाहिए कि ये स्वर्ण आयोग की मांग करने वाला वही समाज है, जो जिला मंडी में दलित बच्चों को मिड डे मिल में अलग बिठाता है, ये वही स्वर्ण समाज है जो जिला कुल्लू में दलितों को घर छूने पर, मंदिर जाने पर, हाथ में देवता का फुल आ जाने पर दलित समाज के लोगों को अमानवीय तरीके से दण्डित करता है। मुख्यमंत्री के को ये भी याद आना चाहिए कि ये वही स्वर्ण समाज है जो शिमला के गांव में दलितों से जबरन मुर्दा जलवाता है, जिला कनौर में जबरन मंदिर में नगाड़ा बजवाता है और ना बजाने पर सामाजिक बहिष्कार कर देता है। ये वही स्वर्ण समाज है जो जिला सिरमौर के शिलाई में दलित कार्यकर्ता केदार सिंह जिदान को सरेआम गांव में दिन दिहाड़े गाडी से कुचल कर मार देता है और उन दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

जिला कांगड़ा में दलित समाज व राजपूतों के लिए अलग अलग रास्ते रखता है। आज के दशक में भी भारत के किसी भी राज्य में दलित अत्याचार व भेदभाव से मुक्त नहीं है। आज जो भी संघठन आरक्षण व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम एक्ट का विरोध कर रहे हैं, उनको सबसे पहले यह मालुम करना चाहिए कि दलितों के साथ अत्याचार भेदभाव पहले आया या आरक्षण व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम एक्ट आया। अगर आज दलित समाज का थोड़ा बहुत उत्थान हुआ है तो वह आरक्षण व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत हुआ है।

इससे पहले दलित समाज को ना ही अच्छा पहनने, अच्छा खाने, अच्छा रहने और ना ही पढने का अधिकार था। दलित समाज के लोगों के गल्ले में मिटटी की हांडी बांधी जाति थी, ताकि उनका थूक भी नीचे ना गिरे, उनके पीछे झाड़ू बाँधा जाता था ताकि उनके पद चिन्ह मिटते जाएं और इतना ही नहीं सार्वजनिक तालाब से एक कुत्ता पानी पी सकता था, लेकिन दलित समाज के लोगों को उस तालाब से पानी पीने का भी अधिकार नहीं हुआ करता था। आज समाज के बड़े बड़े ठेकेदार आरक्षण व अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम का विरोध करके अपनी अपनी राजनितिक रोटियाँ सेक रहे है, उनको इसका विरोध ना करके दलितों के साथ अत्याचार व भेद भाव को खत्म करना चाहिए। दलित समाज का मुख्यमंत्री से यही कहना है कि अगर स्वर्ण आयोग बनता है तो दलित समाज के साथ अत्याचार बड़े पैमाने पर बढ़ जाएंगे। हम आग्रह करते है कि सरकार अपने इस फैसले को वापिस ले और हिमाचल से दलित अत्याचार को खत्म करे।