हिमाचल में हर रोज बन रही 115 टन ऑक्सीजन, हर रोज 100 टन भेजी जा रही दूसरे राज्यों को

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच और मरीजों के इलाज के दौरान देशभर में ऑक्सीजन की कमी के चलते मचे हाहाकार मचा हुआ है। ऑक्सीजन की इस किल्लत के बीच फार्मा हब हिमाचल प्रदेश एक बार फिर देश के लिए मदद को आगे आ गया है। प्रदेश के उद्योगों में हर रोज 115 टन तरल ऑक्सीजन तैयार हो रही है, जबकि ऑक्सीजन गैस के 3500 सिलेंडर भी तैयार किए जा रहे हैं।  इस उत्पादन में से वर्तमान ऑक्सीजन की जरूरत पूरा करने के लिए तरल ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनी आइनॉक्स गैसेज 15 टन हिमाचल प्रदेश को मुहैया करा रही है। 

बाकी 100 टन तरल ऑक्सीजन हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ के अस्पतालों को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मात्रा के अनुसार दे रही है। सिलिंडर वाली ऑक्सीजन तैयार करने वाले उद्योग भी पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सप्लाई कर रहे हैं। ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने के लिए अब प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग राम सुभग सिंह ने पहले वर्क फ्रॉम होम के दिन ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले करीब एक दर्जन उद्योगों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक की। बैठक में राम सुभग ने ऑक्सीजन उत्पादकों से उत्पादन बढ़ाने को कहा। आइनॉक्स, हाईटेक इंडस्ट्रीज, जैसी कुछ ऑक्सीजन उत्पादन कंपनियों ने अपने प्लांटों के विस्तार की बात कही। 

हालांकि उन्होंने सस्ती बिजली और जमीन के अलावा मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन पर जीएसटी रिफंड मांगा है। राम सुभग सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योगों की हरसंभव मदद करेगी। एसीएस ने कहा कि उद्योग विभाग हर दिन ऑक्सीजन उत्पादन की निगरानी करेगा। हिमाचल प्रदेश में तैयार ऑक्सीजन जरूरतमंदों तक पहुंचाने में पुलिस भी योगदान देगी। केंद्रीय गृह सचिव के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। वैसे तो हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक है, लेकिन पड़ोसी राज्यों में ऑक्सीजन को लेकर मच रहे हाहाकार के बीच ऑक्सीजन बनाने वाले उद्योगों और परिवहन करने वाले वाहनों की सुरक्षा का ध्यान रखने की जरूरत है। 

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