ज्ञानचन्द ने 15 मिनट तक भालू से लड़ी जिंदगी की जंग, गंभीर रूप से घायल

सोलन। वन विभाग में माली के पद पर तैनात ज्ञानचंद की बहादुरी के आगे भालू ने घुटने टेक दिए। 55 वर्षीय ज्ञान चंद के साथ भालू की करीब 15 मिनट तक लड़ाई होती रही और आखिर में जीत ज्ञान चंद की हुई। हालांकि भालू द्वारा हमला किए जाने की वजह से ज्ञानचंद को गहरी चोटे लगी हैं।

वन उपमंडल के तहत आने वाले बिशा गांव का रहने वाला ज्ञान चंद प्रतिदिन की तरह सुबह करीब 9 बजे नर्सरी में डयूटी के लिए जा रहा था। नर्सरी के समीप ज्ञानचंद पर भालू ने हमला कर दिया। वन विभाग में माली के पद पर तैनात ज्ञान चंद ने भालू का बेहद बहादुरी के साथ मुकाबला किया। इस मुकाबले में ज्ञानचंद के पांव हाथ व मुंह पर गहरी चोटें लगी हैं। ज्ञानचंद खाली हाथ था। वह अपने दोनों हाथों से भालू के हमले को रोक रहा था। काफी देर तक लड़ाई करने के बाद भालू को आखिर मौके से हार कर भागना पड़ा।

स्थानीय ग्रामीण ज्ञानचंद को उपचार के लिए शोघी अस्पताल लेकर आए, जहां से उसे आइजीएमसी शिमला के लिए रेफर कर दिया गया है। तेंदुए के खौफ के बाद अब क्षेत्र में भालू का खौफ भी काफी अधिक है। ग्रामीण जंगली जानवरों के डर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। क्षेत्रवासियों की मांग है कि इन जानवरों को पिंजरे में कैद किया जाए। जिस क्षेत्र में वीरवार को ज्ञानचंद पर हमला हुआ है वहां ग्रामीण अकसर लकड़ी व घास आदि लेने के लिए जाते हैं। इस हमले के बाद अब लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।

वन विभाग के डिएफओ श्रेष्ठानंद का कहना है कि भालू के हमले की वजह से ज्ञानचंद को काफी चोटे लगी हैं, लेकिन उसकी हालत सही है व खतरे वाली कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भालु को पकड़़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरे लगाए जा रहे हैं।

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