पड़पोती ने खोजा काले पानी की सजा का सच, स्वतंत्रता सेनानी भाई हिरदा राम के संबंध में जुटाए हैरान कर देने वाले तथ्य

संस्कार और जुनून एक साथ हों, तो कोई भी काम असंभव नहीं। इसकी साक्षात मिसाल कायम की है मंडी के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी भाई हिरदा राम की पड़पोती शाम्भवी मिन्हास ने। शाम्भवी इन दिनों अंडेमान में आईएसएमआर संस्थान में विज्ञानी के तौर पर कार्यरत हंै। शाम्भवी के मन में विचार कौंधा की उनके पड़दादा के काला पानी की सजा के दौरान पूरे व सही आंकड़े कहीं उपलब्ध नहीं है। क्यों न प्रयास किया जाए और सही तथ्य जुटाए जाएं।

उसने प्रयास शुरू किए। आखिर बड़ी मशक्कत व सेलुलर जेल के अधिकारियों के साथ बार बार संपर्क करने के बाद वह अब जाकर सफल हुईं। हाल ही में उसने आखिर वह पन्ना खोज डाला, जिसमें भाई हिरदा राम को लेकर जिक्र किया गया है। इसके अनुसार भाई हिरदा राम के खिलाफ अंग्रेजों ने भादंसं की धारा-121, 121-ए, 122, 131, 397, 398, 395, 302 व 109 के तहत मामला दर्ज करके मृत्युदंड दिया था, जिसे बाद में उम्र कैद में बदला गया और उन्हें 29 अक्तूबर 1915 को अंडमान जेल में कैद किया गया। 1921 में उन्हें वापस भारत की जेलों में भेजने का निर्णय हुआ। 1930 में उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। पुस्तक में उनका नाम हिदा राम छपा है। यह सब अब ऑन रिकार्ड उपलब्ध हो गया।

उधर अब स्वतंत्रता सेनानी भाई हिरदा राम के पौत्र व रिकार्ड तलाशने वाली शाम्भवी के पिता रिटायर्ड इंजीनियर शमशेर मिन्हास का कहना है कि उनका परिवार चाहता है कि प्रदेश सरकार अपना 2022 का केलैंडर भाई हिरदाराम क्रांतिकारी के नाम से सचित्र प्रकाशित करें, इंदिरा मार्केट पर स्थापित उनकी प्रतिमा के चारों ओर सुंदर रेलिंग लगाई जाए व इसका सौंदर्यकरण किया जाए। इसे अलावा उन्होंने अन्य मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं।

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