कंगना के पड़दादा सुरम सिंह की आत्मा भी रोने से नही रुक पाई होगी- विप्लव ठाकुर

राज्यसभा की पूर्व सदस्य विप्लव ठाकुर ने कहा कि फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने वर्ष 1947 में भीख के कटोरे में देश को मिली आजादी का एक ऐसा घिनोना वक्तव्य दिया है, जिससे न केवल स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले लाखों लाख ज्ञात अज्ञात क्रांतिकारियों, बलिदानियों बल्कि उसके अपने पडदादा सूरम सिंह की आत्मा भी रोने से रह नहीं पाई होगी। उन्होंने कहा कि वह कंगना की ऐसी संकीर्ण मानसिकता ऐसे घिनौने वक्तव्य से पाकर स्वयं बहुत आहत हुई हूं। ठाकुर ने कहा कि वह स्वयं भी क्रांतिकारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। देश को आजाद करवाने के लिए चले स्वतंत्रता संग्राम में लाखों लाख क्रांतिकारियों ने अपने और अपने परिवारों की परवाह किए बगैर अपनी देश को गुलामी की जंजीरों से छुड़ाने को लेकर ब्रिटिश सरकार के तशदद को अपनी जिंदगियों पर सहा था। उन्हीं संघर्षो के नतीजे से मिली देश को आजादी की खुली सांसों के माहौल में आज कंगना सहित हम सब जीवन जीने के लायक हो पाए हैं।

अफसोस इस बात का कि आज कंगना रनौत जैसी शख्शियतें सियासी स्वार्थों के अंधेरों में रह कर क्रांतिकारियों, बलिदानियों और यहां तक की अपने पूर्वजों के गौरवशाली इतिहासों को पैरों तले रौंद कर अनावश्यक अनाप छाप बयानबाजी करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंगना के पड़दादा सूरम सिंह का देश के स्वतंत्रता संग्राम में बड़ा योगदान रहा है। वह पूर्व सैनिक रहे हैं। उन्होंने कंगना रनौत से कहा कि वह देश का नहीं तो कम से कम अपने परिवार के पूर्वजों का ही गौरव शाली इतिहास खंगाल कर देख लें। कंगना के पड़दादा सूरम सिंह वर्ष 1957 से 62 तक और वर्ष 1962 से 67 तक असैंबली मे जिला मंडी से प्रतिनिधिमंडल करते हुए विधायक रहे हैं।

उन्होंने कंगना रनौत से पूछा कि वह बताएं कि आपके पड़दादा असैंबली में मिला सम्मान भीख के कटोरे में मिली आजादी का परिणाम रहा है। उन्होंने कहा कि मानवीय जीवन में जो सम्मान मिलता है, वह वास्तव में पूर्वजों का ही एक तरह से आशीर्वाद होता है। कंगना रनौत को अपने पड़दादा सूरम सिंह के असेंबली में सुरक्षित पड़े आज भी भाषणों के रिकार्ड को देखना चाहिए। रनौत का देश आजादी पर वक्तव्य वास्तव में क्रांतिकारियों, हिमाचल प्रदेश और विशेष कर उनके अपने वंशज के पूर्वजों का अनादर करने वाला है। कंगना को यदि अपने पूर्वजों के मेरे द्वारा बताए इतिहास पर यदि यकीन आ जाता है तो उसे बिना देरी किए शर्मिदा हुए देश से माफी मांग लेनी चाहिए।

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