हमीरपुर में कोरोना के चलते आठ प्राइवेट स्कूल हुए बंद, बसे भी बेचने की भी है तैयारी

Himachal News: प्रदेश में करीब डेढ़ साल से छाए कोरोना संकट ने निजी शिक्षण संस्थानों की कमर तोड़ कर रख दी है। आलम ऐसा है कि प्रबंधन को हमीरपुर के आठ निजी स्कूल बंद करने पड़ गए। इसके पीछे एक कारण तो स्कूल फीस के उपजे विवाद के कारण प्रबंधन को समय पर फीस नहीं मिल पाई, जिसके चलते कुछ जगहों पर स्कूल प्रबंधन बसों इत्यादि के लिए बैंकों से लिए लोन नहीं भर पाया, तो कुछ जगहों पर किराए पर लिए स्कूल की बिल्डिंग इत्यादि का रेंट और रखे गए अध्यापकों के वेतन का भुगतान करने में असमर्थ हो गया। हालांकि एजुकेशनल हब कहे जाने वाले जिला हमीरपुर में स्कूलों का यूं बंद होना परेशानी भरा सबब है।

 जिला में बंद हुए आठ निजी स्कूलों में हाई, मिडल और प्राइमरी स्कूल हैं। बताते हैं कि स्कूलों पर कोरोना संकट की डेढ़ साल की समयावधि में इतना आर्थिक संकट छा गया कि मजबूरन स्कूलों को बंद करना पड़ गया, क्योंकि सरकार की ओर से भी इन स्कूलों को किसी तरह की रियायत नहीं दी गई। फीस कम करना प्रबंधन के बस से बाहर रहा, जिसके चलते अधिकतर छात्रों ने सरकारी स्कूलों का रुख कर लिया। जब स्कूलों में बच्चों की नाममात्र स्ट्रेंथ रह गई, तो मजबूरन प्रबंधन को स्कूल बंद करने पड़ गए। इनमें कुछ स्कूल दस से पंद्रह साल पुराने भी थे।

कुछ स्कूल मालिक, जिन्होंने बसें लोन पर ले रखी हैं और वे डेढ़ साल से खड़ी हैं, उन्होंने स्कूल बसें बेचने और उनके परमिट जमा करवाने का फैसला किया है, ताकि वे लोन भर सकें और टैक्स के बोझ से बच सकें। बताते चलें कि कोरोना काल में ऑनलाइन क्लासेज लगने के कारण स्कूल फीस और अन्य फंड इत्यादि को लेकर बच्चों के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद गहराया रहा। कई जगहों पर अभिभावकों ने स्कूल फीस देना ही बंद कर दी, तो कई जगहों पर बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा दिया। अब कुछ निजी स्कूल, जोकि या तो किराए की बिल्डिंग में चल रहे थे या फिर जिन्होंने बैंकों से लोन ले रखे थे, उनके लिए लोन की किस्त भरना और शिक्षकों के वेतन का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि उन्हें स्कूल बंद करने पड़ गए।

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