Mandi: 2 करोड़ 80 लाख स्क्वेयर फुट रेत के खनन और हजारों पेड़ काटने के बाबजूद नही हो रही कोई कानूनी कार्यवाही

नाचन के जासन बीट में हजारों पेड़ों और लाखों मीट्रिक टन रेत का अवैध खनन मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले दिनों मीडिया में यह मामला आते ही कंजरवेटर मंडी ने फारेस्ट गार्ड और बीओ को निलंबित कर दिया है तथा पुलिस स्टेशन गोहर में करोड़ों का अवैध खनन और कटान करने वाले दो ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इन सबके बाबजूद पिछले दिनों स्थानीय लोग, पंचायत प्रधान और भाजपा कार्यकर्ता उस स्थान पर पहुंचे और उन्होंने वहां प्रेस को बुला कर अपने बयान दिए। उनका कहना था कि यहां श्रमदान के द्वारा मैदान का निर्माण किया गया है और पेड़ों को आदमियों के शवों को जलाने के लिए प्रयोग किया गया है जबकि यह कतई तर्क संगत नही है। पिछले एक महीने में पूरे हिमाचल में इतनी मौतें नही हुई होंगी जितने यहां पेड़ काटे गए है।

Right News द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक उस स्थान पर चैल चौक पंचायत की प्रधान तथा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य ने माना है कि यह अवैध काटन व खनन उनकी देख रेख में श्रमदान द्वारा किया क्या है। जबकि धरातल पर स्थिति एकदम अलग है। पूरे मैदान में हर ओर जेसीबी और बुलडोजर द्वारा काटन व खनन के निशान मौजूद है। जिससे साफ समझ आता है कि अब इस मामले को दबाने की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो चुकी है। मामले को दबाने की कोशिश में भाजपा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और स्थानीय पंचायत की प्रधान का अहम योगदान है। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि इस करोड़ों के घोटाले के हो जाने के बाबजूद वन मंत्री राकेश पठानिया अभी तक चुप है।

आपको बता दें कि इस स्थान पर तीन बड़ी बड़ी पहाड़ियों को काट कर लगभग 25 बीघा का रकवा साफ किया गया है। जोकि श्रम दान के द्वारा करवाना नामुमकिन है। क्योंकि कोई भी आदमियों के समूह महज एक महीने में 25 बीघा के रकवे से 100-150 फुट की ऊंचाई के बराबर तक खनन नही कर सकता। अंदाजन इस स्थान से लगभग 2 करोड़ 80 लाख स्क्वेयर फुट रेत को निकाला गया है जिसकी कीमत करोड़ों रुपये की बनती है और यहां हजारों पेड़ों को 25 बीघा जमीन से साफ किया गया है जिनकी कीमत भी करोड़ों रुपये बनती है।

गूगल मैप पर एक महीना पहले की स्थिति

आपको यह भी बता दें कि यह फारेस्ट गॉर्ड और बिओ वही है जिनको कुछ समय पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया ने भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए खाना कम पड़ने पर निलंबित कर दिया था। फारेस्ट गार्ड की कुछ महीने पहले ट्रांसफर हो चुकी है। लेकिन उसको आज तक रिलीव नही किया गया। तथा अब पूरे अवैध खनन का ठीकरा उसने सिर फोड़ कर उसको निलंबित कर दिया है।

आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि इस मामले में वन विभाग के आला अधिकारियों को कोई जानकारी नही है। जब मामला मीडिया में आया तब जाकर डीएफओ गोहर और कंजरवेटर मंडी की नींद खुली। जबकि यह स्थान डीएफओ कार्यालय से महज तीन किमी की दूरी पर है। यहां से विधायक नाचन का घर महज कुछ मीटर की दूरी पर है और इस स्थान के साथ ही वन विभाग का विश्राम गृह भी है जहां हर समय कोई ना कोई वन विभाग का अधिकारी मौजूद रहता है।

अवैध खनन के बाद आज की स्थिति

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फारेस्ट गार्ड और बीओ पर भारी दबाब बना कर यह काम उच्च अधिकारियों और नेता ने करवाया है। किसी भी अधिकारी व नेता ने फारेस्ट गार्ड और बीओ की बात को नही सुना और जबरदस्ती 25 बीघा के रकवे को मैदान में परिवर्तित कर दिया गया। यहां से बाकायदा टिप्परों का प्रयोग करके करोड़ों का रेत बेचा गया है और पेड़ों को काट कर उनकी तस्करी की गई है। जिसका सारा पैसा नेता और ठेकेदारों की जेब में गया है और भारी राजनीतिक दबाब के चलते मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है।

अब देखना यह होगा कि पुलिस एफआईआर करने के बाद क्या कार्यवाही करती है। क्या दोषियों को जेल में डाल कर वन विभाग की संपत्ति की भरपाई की जाएगी या फिर मामला एफआईआर पर ही दम तोड़ देगा।

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