Shimla News: नोटबंदी आजाद भारत का सबसे गलत फैसला: कांग्रेस

नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा और गलत फैसला था। इससे देश ने पाया कुछ नहीं, जबकि खोया बहुत कुछ है। यह बात अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने शिमला में पत्रकार वार्ता मेंकही।

उन्होंने कहा है कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हुई है। देश में आज नोटबंदी की पांचवीं वर्षगांठ है और अभी भी देश उस फैसले से उभर नहीं पाया है। उन्होंने कहा कि जब यह निर्णय लिया गया था तो कहा गया था कि इससे काला धन बाहर आएगा और टैरर फंङ्क्षडग खत्म होगी, न काला धन बाहर आया और न टैरर फंङ्क्षडग रुक पाई। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को जितना नुक्सान नोटबंदी से हुआ है, उतना कोविड से भी नहीं हुआ। इससे पता चलता है कि कैसे एक तुगलकी फरमान ने देश की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस किया है। अब भाजपा को लोग भी कहने लगे हैं कि यह फैसला सही नहीं था। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने उसी समय कहा था कि यह फैसला बहुत गलत है और देश की अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे और आज सभी यह देख भी रहे हैं।

पूर्व सी.ए.जी. ने रचा षड्यंत्र
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पूर्व यू.पी.ए. सरकार के खिलाफ 2010-14 के बीच जो षड्यंत्र रचा था। पूर्व सी.ए.जी. विनोद राय ने भाजपा की कठपुतली बनकर यू.पी.ए. सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रचा और अब उसकी परतें खुल रही हैं। उन्होंने कहा कि विनोद राय ने उन पर संजय निरुपम द्वारा दायर मानहानि केस में कोर्ट में शपथ पत्र देकर माना कि उन्होंने यू.पी.ए. सरकार में हुए स्कैम को लेकर झूठ बोला था और वे माफी मांगते हैं। भाजपा के इशारे पर मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ यह अभियान चलाया था। इसके बाद भाजपा नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं और अन्ना हजारे, बाबा राम देव, अरविंद केजरीवाल इत्यादि ने अभियान यू.पी.ए. के खिलाफ अभियान चलाया। इन सभी को अब देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

स्वायत संस्थाएं की गईं कमजोर
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि आज देश की स्वायत संस्थाएं बहुत कमजोर हो गई हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण पी.एम. केयर्ज को लेकर कोई सवाल न उठाना है। जब पी.एम. केयर्ज में देश के करदाताओं का पैसा दिया गया है तो इसका ऑडिट क्यों नहीं किया जा रहा। आज स्वायत संस्थाएं कहां हैं और वे क्यों खामोश हैं? देश में महंगाई बहुत बड़ा मुद्दा है और उपचुनावों में मिली हार के बाद देश की सरकार ने पैट्रोल के दाम कुछ कम किए हैं। यह नाकाफी है और अभी तक रसोई गैस के दाम तो कम भी नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि उन्होंने मुंह खोला तो उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हो जाएगा।

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