पांवटा साहिब में निजी कंपनी से पकड़ी 15 करोड़ की नशीली दवाओं का मास्टर माइंड आरोपी गिरफ्त से बाहर

उपमंडल पांवटा साहिब के देवीनगर में पंजाब पुलिस द्वारा एक निजी दवा कंपनी में अवैध नशे के धंधे का भंडाफोड़ करने के मामले में अभी भी मास्टरमाइंड पकड़ से दूर है। 15 करोड़ के नशीली दवा मामले में कंपनी में काम करने वाले पांवटा साहिब के जिस व्यक्ति को पकड़ा गया है, दरअसल दवा बनाने का लाइसैंस पांवटा साहिब उसी व्यक्ति के नाम पर होने के कारण कंपनी का मालिक उन्हें ही माना गया है और पंजाब पुलिस उसे हिरासत में लेकर पंजाब ले गई है लेकिन मुख्य मास्टरमाइंड इस बार भी बड़े ही शातिर तरीके से बच गया है। 


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बता दें कि नशे का मास्टरमाइंड नशीली दवाओं की खेप पंजाब तक पहुंचा रहा था, जिसका भंडाफोड़ पंजाब पुलिस ने किया तथा 15 करोड़ रुपए की नशीली दवाओं की खेप बरामद की। एसपी सिरमौर खुशहाल चंद शर्मा ने बताया कि इस मामले में पंजाब पुलिस जांच कर रही है तथा यह पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन जुड़े हुए हैं तथा कहां-कहां पर इनका काम चल रहा है।

2019 में भी हुआ था ऐसा

बताया जा रहा है कि 2 वर्ष पहले 2019 में भी प्रदेश नारकोटिक्स की टीम ने पांवटा साहिब के पुरूवाला में एक कंपनी के स्टोर में छापेमारी कर करोड़ों रुपए की नशीली दवाओं का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान भी नशे के मास्टरमाइंड ने कंपनी में काम करने वाले एक व्यक्ति के नाम स्टोर का एग्रीमैंट बनाया था, जिसमें कंपनी में काम करने वाला व्यक्ति मामले में फंस गया तथा मास्टरमाइंड उस दौरान भी मामले से बच गया लेकिन उसके बाद नशा माफिया के मास्टरमाइंड ने 3 महीने पहले फिर से पांवटा साहिब के एक व्यक्ति के नाम पर दवा बनाने का लाइसैंस ले लिया तथा व्यक्ति को अपनी कंपनी में नौकरी पर रख लिया और पांवटा साहिब के देवीनगर में कांग्रेस के बड़े नेता के मकान को किराए पर लेकर कंपनी को 3 महीने से वहां पर चलाया जा रहा था।

कालाअंब की एक दवा कंपनी की दवा से जम्मू में हुई थी 10 बच्चों की मौत

प्रदेश में बन रही दवाओं पर समय पर सवाल उठते रहे हैं। पिछले वर्ष तो जिला सिरमौर के कालाअंब में खांसी की दवा ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश को शर्मसार होने पर मजबूर कर दिया था। इस दवा के पीने से जम्मू के ऊधमपुर जिला में 10 बच्चों की मौत हो गई थी। कालाअंब की डिजीटल विजन कंपनी की इस विवादित कोल्ड बेस्ट पीसी दवा के कई बैच के सैंपल फेल हो गए थे। यह मामला सामने आने के बाद कंपनी को फरवरी 2020 में सील करने के बाद इसके लाइसेंस को भी निलंबित किया था। जम्मू प्रशासन ने प्रदेश सरकार से भी इस मामले को उठाया था। इसके बाद कालाअंब थाना में कॉस्मैटिक एक्ट की धारा 18ए, वन, 17 ए, 27ए और आईपीसी की धारा 308 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था। सूत्रों का कहना है कि इस दवा में डिथलेन ग्लोकल कैमिकल की मात्रा 34 फीसदी से अधिक पाई गई थी, जोकि सेहत के काफी खतरनाक थी। इस कंपनी को 17 फरवरी 2020 को सील किया गया था। हैरानी की बात यह थी कंपनी में बनी घटिया दवाई की ड्रग विभाग को खबर तक नहीं लगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए थे।

सवालों के घेरे में हिमाचल का ड्रग महकमा

पंजाब पुलिस की पांवटा साहिब के यूनीक फॉर्मूलेशन फार्मा उद्योग में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हिमाचल का ड्रग महकमा सवालों के घेरे में आ गया है। पड़ोसी राज्य की पुलिस इतने बड़े मामले का खुलासा कर गई, लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि ड्रग महकमा कहां सोया हुआ था। हालांकि कंपनी के पास दवाएं बनाने का लाइसैंस मौजूद था लेकिन कई खामियों के चलते पंजाब पुलिस उद्योग में तैयार की गईं दवाओं की बड़ी खेप को कब्जे में लेकर अपने साथ ले गई। सवाल उठ रहा है कि यदि ड्रग महकमा समय पर फार्मा कंपनियों की जांच करता है तो उक्त कंपनी की ये खामियां ड्रग महकमे को क्यों नहीं दिखाई दीं, जोकि पंजाब पुलिस ने अपनी जांच में देखीं। फार्मा कंपनी के अंदर प्रोडक्शन कितनी मात्रा में हो रहा है और सप्लाई जहां के लिए भेजी गई थी, वहां न पहुंचकर कहीं और पहुंच गई। इसकी भनक भी ड्रग महकमे को तब लगी, जब पंजाब पुलिस की टीम यहां छापामारी करने पहुंची।

सहायक ड्रग कंट्रोलर सन्नी कौशल का कहना है कि समय समय पर फार्मा कंपनियों के रिकार्ड की जांच की जाती है। जहां तक ताजा मामले की बात है तो दवाओं की खेप पंजाब में पकड़ी गई है और वहीं की पुलिस भी इसकी जांच कर रही है। विभाग द्वारा अपने स्तर पर भी गहनता से जांच की जा रही है कि यदि दवाओं की सप्लाई दिल्ली के लिए गई थी तो वहां संबंधित कंपनी में ये दवाएं पहुंचीं या नहीं। यदि ये दवाएं दिल्ली के लिए भेजी गई थीं तो पंजाब कैसे पहुंच गईं। यदि किसी ने गलत किया होगा तो उसे बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा।


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