ऊना में झोलाछाप डॉक्टर की गलती से हुई कोरोना मरीज की मौत, प्रशासन ने कसा शिकंजा

हिमाचल में झोलाछाप चिकित्सक के कारण एक कोरोना संक्रमित मरीज की जान चली गई। मामला ऊना जिला मुख्यालय के समीपवर्ती गांव रामपुर का है। वहीं मामले का पता चलते ही प्रशासन ने इस निजी प्रैक्टिशनर के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। युवा कोविड-19 संक्रमित मरीज की मौत मामले को लेकर जब प्रशासन ने छानबीन शुरू की तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जो हैरान करने वाले हैं।

बताया जा रहा है कि यह प्रैक्टिशनर बिना किसी नाम, बोर्ड, डिग्री या रजिस्ट्रेशन के कई सालों से प्रैक्टिस कर रहा है।

वही हाल ही में संक्रमण के चलते दम तोड़ने वाले युवा मरीज की केस हिस्ट्री में यह खुलासा हुआ कि वह कई दिन से इसी निजी प्रैक्टिशनर से दवाई लेता रहा। जब हालात बेहद बिगड़ गए तो उसके बाद यह मरीज अस्पताल पहुंचा, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद इसे बचाया नहीं जा सका। युवक का अस्पताल में ही कोरोना टेस्ट करने पर उसके संक्रमित पाए जाने की पुष्टि हुई। संक्रमण के चलते युवा मरीज की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच करने का फैसला लिया। जिसके बाद एसडीएम के साथ ड्रग इंस्पेक्टर, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर आधारित टीम ने इसकी जांच शुरू की। आरंभिक जांच में ही हुए खुलासों से सभी के होश फाख्ता हो गए हैं। एसडीएम ऊना डॉक्टर निधि पटेल ने बताया कि प्रशासनिक टीम ने इस झोलाछाप चिकित्सक के खिलाफ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासनिक टीम द्वारा इस व्यक्ति का चालान काटा गया है, जबकि इसके खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 18ए और 18 सी के तहत मुकद्दमा भी दर्ज किया जा रहा है।

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