कन्फ्यूज्ड सरकार का हर कदम विरोधाभासी है- राजेश धर्माणी

घुमारवीं में प्रस्तावित “संयुक्त कार्यलय भवन” (जिसे जनता को भ्रमित करने के लिए संयुक्त सचिवालय भवन नाम से बोला जा रहा है) के निर्माण शुरू होने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ कोषागार भवन का शिलान्यास रखा जा रहा है। प्रस्तावित कोषागार भवन के साथ ही रोजगार कार्यलय भवन और समाज कल्याण विभाग का कार्यलय भवन भी निर्माणाधीन है।

आधुनिक समय में तो सभी सेवाएं “ऑनलाइन” उपलब्ध करवाकर मोबाइल से प्राप्त करने का दौर चला है जिसे और तेज गति से आगे बढ़ाना चाहिए ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाना पड़ें ।
एक तरफ सरकार सभी कार्यलयों को एक भवन में लाने की बात करती है और दूसरी तरफ प्रस्तावित संयुक्त सचिवालय भवन से दूर नए भवन बनाए जा रहे हैं। कई कार्य पैसे के अभाव से लटके हैं और दूसरी तरफ इस तरह के विरोधाभासी कदम उठाए जा रहे हैं।

किसी व्यक्ति का ऐसा कोई काम नहीं होता कि एक ही समय में उसे सभी अधिकारियों से मिलने की जरूरत पड़ेगी। आम आदमी की समस्याओं को सुलझाने के सत्ताधारी नेताओं को अपनी सोच ठीक करनी चाहिए जो हर काम पार्टी देखकर करते हैं। सिर्फ भवन बन जाने से समस्याओं का हल हो जाने का राग भी इसी लिए जपा जा रहा है ताकि अपने काले कारनामों पर पर्दा डाला जा सके।

आम आदमी के सबसे ज्यादा काम पंचायत, पटवारी, जे.ई. , थाना, वन अधिकारी, डाक विभाग, स्कूल व कालेज आदि से संबंधित होते हैं और इन सभी के कार्यलय प्रस्तावित “कंबाईनड कार्यलय भवन” में ‘नहीं’ होंगे- ये कार्यलय जहाँ हैं वहीं रहेंगे।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पूर्व सीपीएस राजेश धर्माणी ने घुमारवीं में प्रस्तावित संयुक्त कार्यालय भवन के साथ ही अलग-अलग स्थानों पर कुछ अन्य भवनों के निर्माण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सभी कार्यालयों को एक ही भवन में लाने की बात की जा रही है, जबकि दूसरी ओर प्रस्तावित भवन से दूर कुछ अन्य भवन भी बनाए जा रहे हैं। यह पूरी तरह से विरोधाभासी स्थिति है। संयुक्त भवन बनने पर जब सभी कार्यालय उसी में शिफ्ट हो जाएंगे तो करोड़ों की लागत से बनने वाले अन्य भवनों का क्या किया जाएगा। क्या इन भवनों को भी बाद में सब्जी मंडी भवन की तरह सत्ता पक्ष के नेताओं को कौड़ियों के भाव दे दिया जाएगा।

राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार हर मामले में पूरी तरह से कनफ्यूज्ड है। इस कनफ्यूजन की वजह से उसका हर कदम भी विरोधाभासी ही रहता है। घुमारवीं में संयुक्त कार्यालय भवन का निर्माण प्रस्तावित है। लोगों को गुमराह करने के लिए इसे संयुक्त सचिवालय भवन भी कहा जा रहा है। उक्त प्रस्तावित भवन से दूर कोषागार भवन की नींव रखने की तैयारी है। इसी भवन के पास रोजगार और समाज कल्याण विभाग के कार्यालय भवन भी निर्माणाधीन हैं। सरकार सभी कार्यालयों को एक ही भवन में लाने की बात करती है। ऐसे में प्रस्तावित संयुक्त सचिवालय भवन से दूर अन्य कार्यालयों के ऐसे भवन बनाने का क्या औचित्य है, जिन्हें बाद में एक ही भवन में शिफ्ट किया जाना हो।
राजेश धर्माणी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में सभी तरह की सेवाएं आॅनलाइन उपलब्ध करवाने की शुरुआत हो चुकी है। इसमें और अधिक तेजी लाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को कार्यालयों के चक्कर काटने से निजात मिल सके। जरूरत के लिहाज से भवन बनाए जाने भी जरूरी हैं, लेकिन आंखें मूंदकर ऐसे भवन बनाने का क्या औचित्य है, जो बाद में खाली हो जाएंगे। जन सुविधा के कई अन्य कार्य धन के अभाव की वजह से अधर में लटके हैं। यही पैसा उन कार्याें पर खर्च किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। घुमारवीं में सब्जी मंडी भवन पहले ही सत्ता पक्ष के एक नेता को कौड़ियों के भाव आवंटित किया जा चुका है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि करोड़ों खर्च करने बनने वाले इन भवनों के खाली हो जाने पर उन्हें भी सत्ता से जुड़े लोगों को औने-पौने दामों में दे दिया जाएगा।

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