शादीशुदा बेटियों को भी करुणामूलक नौकरी, विभागों में 4000 से ज्यादा आवेदन पेंडिंग

हिमाचल में सरकारी या अनुबंध कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मौत के बाद उनकी शादीशुदा बेटियां भी करुणामूलक कोटे के तहत नौकरी की हकदार होंगी। यह लिखित क्लैरिफिकेशन राज्य के वित्त विभाग में हाई कोर्ट में चल रहे दो मामलों के जवाब में दी है। ये केस आयुर्वेद और पशुपालन विभागों से चल रहे हंै। इसमें से आयुर्वेद विभाग के केस में आवेदक अकेली बेटी थी। शादी होने के बाद इस आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने आवेदन को फिर से कंसीडर करने को कहा, लेकिन कंसीडर न होने पर केस हाई कोर्ट आया और हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि वह इसमें क्या कर रही है? दूसरा केस पशुपालन विभाग से दायर हुआ।

रहेंगी दो शर्तें
बेटी के अपने परिवार और ससुराल में से कोई सरकारी नौकरी में न हो।
आय सीमा को बेटी के परिवार की आय काउंट की जाए, ससुराल की नहीं।

इसके बाद वित्त विभाग ने विधि विभाग और एडवोकेट जनरल से सलाह लेने के लिए लिखित क्लैरिफिकेशन जारी की है। इस क्लैरिफिकेशन में कुछ शर्तों के साथ शादीशुदा बेटी को भी इस नौकरी के लिए पात्र  बताया गया है। इसके अनुसार इसमें दो शर्तें रहेंगी। पहली यह कि दोनों परिवारों यानी बेटी के अपने परिवार और ससुराल में से किसी परिवार में कोई सरकारी नौकरी में न हो। दूसरी शर्त यह कि पॉलिसी मेें तय आय सीमा के लिए बेटी के परिवार की आय काउंट की जाए, ससुराल के परिवार की नहीं। वित्त विभाग से यह क्लैरिफिकेशन अब कोर्ट में दायर हो गई है। इसी अनुसार अब करुणामूलक भर्ती नीति में भी यह संशोधन हो रहा है। इस संशोधन के साथ ही अब शादीशुदा बेटियों को भी इस नौकरी के लिए पात्र माना जाएगा। यह इस नीति में बड़ा बदलाव होगा। वैसे करुणामूलक भर्ती नीति में और भी बड़े संशोधन होने वाले हैं। पिछली कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी विभागों से रिपोर्ट लेकर संशोधित पॉलिसी का ड्राफ्ट दिसंबर महीने की कैबिनेट में लाने को कहा है, ताकि इस बारे में फैसला लिया जा सके।

विभागों में 4000 से ज्यादा आवेदन पेंडिंग
वर्तमान में करुणामूलक भर्ती के 4000 से ज्यादा आवेदन विभिन्न विभागों में पड़े हैं। हालांकि पिछली कैबिनेट में मंत्रिमंडल की हिदायत के बाद लंबित मामले क्लीयर करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। कुछ विभाग अपने यहां पात्र आवेदकों को नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं, लेकिन कैडर के पांच फीसदी पदों को भरने की सीलिंग और आय सीमा की शर्त आवेदकों पर भारी पड़ रही है। अब नया वेतन आयोग मिलने वाला है, इसलिए यदि आय सीमा नहीं बढ़ी, तो आवेदन और मुश्किल में आएंगे। करुणामूलक आवेदक सौ से ज्यादा दिनों से शिमला में क्रमिक हड़ताल पर बैठे हैं।

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